अनंतकुमार हेगड़े: महात्मा गांधी का स्वतंत्र संग्राम महज एक नाटक

बेंगलुरु, राजनीति में कभी-कभी ऐसा भी होता है जब कई दिवंगत नेताओं का नाम भी वर्तमान परिदृश्य में लिया जाता है। फिर चाहे वह उनके कार्यों को लेकर लिया जाए या फिर उनकी नाकामयाबियों पर। ऐसा ही कुछ वाकया

बेंगलुरु, राजनीति में कभी-कभी ऐसा भी होता है जब कई दिवंगत नेताओं का नाम भी वर्तमान परिदृश्य में लिया जाता है। फिर चाहे वह उनके कार्यों को लेकर लिया जाए या फिर उनकी नाकामयाबियों पर। ऐसा ही कुछ वाकया बीजेपी के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े द्वारा किया गया जब उन्होंने यह बयान दिया कि इतिहास के किताबों में यह लिखा जाना की महात्मा गांधी द्वारा भारत के स्वतंत्रता आंदोलन नेतृत्व नहज एक नाटक या फिर अफवाह है। यही नहीं हेगड़े ने गांधी के ‘महात्मा’ कहलाने पर भी यतोचित सवाल उठाये।

विगत शनिवार को कर्नाटक के बेंगलुरु में एक सभा को सम्बोधित करते हुए अनंत कुमार हेगड़े ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर कुछ बातें कहीं। उन्होंने कहा कि " यह पूरा संग्राम गाँधी द्वारा रचा गया मात्र एक नाटक था। इस पुरे संग्राम को बाकायदा, ब्रिटिश सरकार की अनुमति और समर्थन प्राप्त था। ताज्जुब होता है कि इस आंदोलन में एक भी तथाकथित नेताओं को पुलिस की मार नहीं पड़ी"।

अनंत कुमार यहीं नहीं रुके और उन्होंने यह भी कहा कि" महात्मा गाँधी का उपवास और सत्याग्रह महज के फिजूल का नाटक ही था। कांग्रेस वाले तो यह भी कहते हैं की गाँधी के आमरण अनशन और सत्यग्रह से भारत को आजादी मिली है। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं था अपितु अंग्रेज अपनी निराशा के चलते भारत छोड़ कर गए थे। यही कारण है कि में जब भी इतिहास पढता हूँ मुझे गुस्सा आ जाता है। यह पढ़ कर कि सिर्फ देशभक्ति का नाटक करने वाले गांधी हमारे देश के लिए महात्मा हो गए। यह कैसे सम्भव है?

अनंत कुमार हेगड़े को जो बोलना था वह बोलकर वे चले गए। लेकिन यह देखना अब रोचक होगा कि उनकी यह बोली बीजेपी को कितना दलदल में फंसाती है क्योंकि कांग्रेस भी अब इसपर शांत नहीं बैठने वाली। आखिर यह राजनीति है और इसमें तो पुराने मुर्दो का उखाड़ के लाना लाजमी सा है। इसके पहले भी संजय राउत ने इंदिरा गाँधी और राहुल गाँधी ने भी सावरकर के बारे में बोलकर यह चलन सा शुरू किया था और हेगड़े तो फिर एक कर्त्वनिष्ठ राजनीतिज्ञ की तरह इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।