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    नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने छह छात्रों के एक समूह द्वारा दायर उस रिट याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि परीक्षा आयोजित करने वाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा उनकी नीट-यूजी उत्तर पुस्तिकाओं के साथ छेड़छाड़ और हेरफेर किया गया था। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की इस दलील को रिकॉर्ड में लिया कि छात्रों द्वारा शिकायतें किये जाने के बाद, उन्हें उसके कार्यालय में बुलाया गया और उन्हें उनकी मूल उत्तर पुस्तिकाएं दिखाई गईं और उन्होंने स्वीकार किया कि यह उनकी उत्तर पुस्तिकाएं थीं।

    पीठ ने उल्लेखित किया कि मूल उत्तर पुस्तिका पर छात्रों और पर्यवेक्षकों के हस्ताक्षर थे और इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि एनटीए किसी भी तरह से अंकों के साथ छेड़छाड़ या हेरफेर में शामिल था। पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा, “प्रथम दृष्टया यह नहीं कहा जा सकता है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के ऑफिस में छेड़छाड़ या हेरफेर का कोई कार्य किया गया था। 15.44 लाख उम्मीदवारों ने परीक्षा दी है, जिनमें से छह इस अदालत में आए हैं। पांच ने उन्हें दिखाई गई उनकी ओएमआर शीट का सत्यापन किया है।”

    पीठ ने एनटीए की ओर से पेश अधिवक्ता रूपेश कुमार की इस दलील पर गौर किया कि प्रति उम्मीदवार केवल एक उत्तर पत्रक है जो ओएमआर शीट है और उनके सर्वर में उपलब्ध है। कुमार ने कहा कि प्रक्रिया के अनुसार, उत्तर पुस्तिका की एक प्रति सभी उम्मीदवारों को उनके पंजीकृत ईमेल आईडी पर भेजी गई थी, जिसमें छह उम्मीदवार भी शामिल थे जिन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है और कहा है कि उन्हें यह प्राप्त नहीं हुआ है।

    सुनवाई के दौरान, पीठ ने छात्रों से सवाल किया कि एनटीए उनके परिणामों में हेरफेर क्यों करना चाहेगा जब वह मूल उत्तर पत्र उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। छात्रों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज स्वरूप ने कहा कि उनके और मूल उत्तर पत्र के बीच कांच का एक विभाजन था और उन्हें मूल शीट को बिना छुए ही दूसरी तरफ से देखने दिया गया।

    उन्होंने कहा, “उन ओएमआर शीट को केवल छूकर ही सत्यापित किया जा सकता है, जिसकी हमें अनुमति नहीं थी।” पीठ ने हालांकि, उनकी दलील से सहमत होने से इनकार कर दिया और कहा कि वह याचिका खारिज कर रही है।