200 क्षमता वाली जेल में 434 कैदी, कोरोना में एक बैरक में दोगुना ठूंसे जा रहे कैदी

लापरवाही..

  • प्रशासन की उदासीनता से नई जेल का प्रस्ताव फांक रहा धूल 
  •  कर्मियों की कमी से जूझ रहा कारागार

जलगांव. जिला प्रशासन की उदासीनता के चलते जिला  कारागार की सुरक्षा व्यवस्था चौपट हो गई है. दिनदहाड़े बंदूक की नोक पर जेल से तीन आरोपी फरार होने में सफल हो गए जिसके चलते जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुली थी.जब जेल की स्थिति और उसकी कमियों के बारे में पूछताछ की, तो कई गंभीर मुद्दे सामने आए.

200 कैदियों की क्षमता वाले जेल में वर्तमान में 434 कैदियों को भरा गया है. अधिक कैदियों की संख्या होने के कारण पर्याप्त मात्रा में जेल पुलिस कर्मियों की कमी से ज़िला कारागार जूझ रहा है.

37 लोगों के भरोसे जेल की सुरक्षा

बंदियों की संख्या को देखते हुए यह उम्मीद है कि 100 से अधिक सुरक्षा गार्ड और 10 अधिकारी होंगे, लेकिन वास्तव में केवल 37 व्यक्तियों के भरोसे जेल की सुरक्षा व्यवस्था संचालित हो रही है. जलगांव जेल में रिक्तियों और कैदियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए जेल उप महानिरीक्षक औरंगाबाद ने पैठान जेल से 20 गार्ड, लातूर और धुलिया से एक-एक सूबेदार और 4 गार्डों को जलगांव जेल में स्थानांतरित किया है. किंतु अभी तक उन्होंने चार्ज संभाला नहीं है .ये आदेश सिर्फ कागजों पर हैं. कैदी कई बार जेल से भाग चुके हैं. कैदियों के बीच आपस में हिंसा की घटनाएं हुई हैं. हर बार उप महानिरीक्षक और महानिरीक्षक ने दौरा किया. हालात के अवलोकन करने के बाद भी पर्याप्त संख्या में जेल कर्मी पुलिस स्टाफ उपलब्ध कराया नहीं गया. 

जेल में अभी भी कई पद खाली

जलगांव जिले में अनेक पद अभी भी रिक्त पड़े हैं.जेल में अधीक्षक सहित 41 पद स्वीकृत किए गए हैं. यह संख्या 200 कैदियों के लिए है. चूंकि यहां 434 कैदी जेल में सजा काट रहे हैं. उपलब्ध जेल कर्मियों का स्टाफ उनके लिए पर्याप्त नहीं है. इसके बावजूद अनेक कर्मी मेडिकल अवकाश तथा अन्य कारणों से छुट्टी पर रहते हैं. कैदियों की बड़ी संख्या के कारण, एक बैरक में कैदियों की संख्या को दोगुना करना पड़ रही है. कोरोना वायरस ने पैर पसार रखे हैं. सरकार प्रशासन ने सोशल डिस्टेंसिंग रखने के आदेश जारी किए हैं. किंतु जेल में पर्याप्त मात्रा में जगह नहीं होने का कैदियों को कोशिश कर रखे जाने का भी खुलासा हुआ है.

80 प्रतिशत कर्मी रहते हैं शहर के बाहर

रात के समय जेल में कोई अनुचित घटना घटित होती है तो ऐसे में ड्यूटी पर कम संख्या में कर्मी उपस्थित होने के कारण कोई भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है, जिसे निपटाने के लिए जेल और अधिकारियों और स्टाफ के क्वार्टर निवास जेल से सटे होना चाहिए.ऐसी अवधारणा है. यहां केवल 10 कर्मचारियों को ही रखा जा सकता है. 80% कर्मचारी शहर के विभिन्न हिस्सों में रहते हैं. जेल की करीब क्वार्टर बनवाने की आवश्यकता है.

समिति की बैठक नहीं

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जेल निरीक्षण समिति का गठन किया गया है.2019 के बाद से इस समिति की कोई बैठक जेल में नहीं हुई, इसलिए, जेल की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है. इस समिति में पुलिस अधीक्षक, जिला विधि सेवा प्राधिकरण सचिव, जिला शल्य चिकित्सक व अन्य अधिकारी सदस्य हैं.

125 एकड़ में जेल मंजूर

जिले के बढ़ते विस्तार, अपराध में वृद्धि और अभियुक्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, भुसावल में कुहा रोड पर 125 एकड़ भूमि पर एक वर्ग 1 जेल को मंजूरी दी गई है. प्रशासन तथा राजनीतिक दलों के नेताओं की उदासीनता के चलते यह प्रकरण अधर में लटका हुआ है.यह प्रस्ताव तत्कालीन अधीक्षक डी.टी.डाबेरावके कार्यकाल के दौरान शुरू किया गया था, लेकिन अब यह मामला धूल फांक रहा है.

जेल की खामियों को किया जा रहा दूर

जेल की दीवारों की ऊंचाई बढ़ाने के लिए काम शुरू कर दिया गया है.कर्मियों की कमी को लेकर एक प्रस्ताव वरिष्ठ कार्यालय को पहले ही भेजा जा चुका है. जेल में कमियों को जानकर उसे सुधारने का प्रयास किया जा रहा है. गलतियों को करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.आंतरिक अनुशासन भी कड़ा कर दिया गया है.कैदियों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है.- गजानन पाटील, अधीक्षक, कारागृह