जोरदार बारिश से किसानों की 833 हेक्टेयर फसलें बर्बाद

  • नुकसान ग्रस्त इलाकों का दौरा कर किया पंचनामा

जलगांव. मौसम के बदले तेवर ने क्षेत्र के किसानों की परेशानियां बढ़ा दी हैं. शनिवार रात एवं मंगलवार शाम हुई जोरदार बारिश से रबी फसल चना, कपास, मूंग, उड़द की फसल को काफी नुकसान हुआ है, वहीं इस बारिश से केले की फ़सल भी प्रभावित हुई है.  वापसी की बारिश से सब्जी की फसल भी प्रभावित हुई है. टमाटर के नए फलों के झड़ने का डर बना हुआ है. सब्जियां ककड़ी, पालक भाजी, प्याज भाजी आदि सब्जी की फसल भी इस बारिश से बेकार होने की आशंका व्यक्त की जा रही है. लगातार बारिश के कारण 833 हेक्टेयर हरा चना और उड़द की फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है. भुसावल तालुका में पिछले पंद्रह से बीस दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिसकी सब से अधिक मार उड़द, हरा चना ,ज्वार , आदि फसलों पर पड़ा है. इसी के साथ कपास मूंग और सोयाबीन को भारी नुकसान हो रहा है.

किसानों की उम्मीदों पर फिरा पानी

लगातार सप्ताह भर में दूसरी बार भारी बारिश के कारण प्रकृति ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. इस बीच तालुका में उड़द और हरा चना की फसलों के नुकसान का निरीक्षण किया गया, जिस में भुसावल तालुका में कुल 833 हेक्टेयर क्षेत्र में उड़द, हरा चना और केले को नुकसान हुआ है. सरकारी अधिकारियों ने इस मामले में नुकसान ग्रस्त इलाकों का दौरा कर पंचनामा किया है. इससे किसानों को थोड़ी राहत मिली है. हालांकि, किसान इस बात पर नजर रख रहे हैं कि उन्हें कब और कितना मुआवजा मिलेगा।

कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन से प्रदूषण मुक्त वातावरण के चलते इस साल के आरंभ में वर्षा ऋतु किसानों पर खासा मेहरबान रही. इस वर्ष की शुरुआत से संतोषजनक वर्षा के कारण फसल अच्छी स्थिति में थी.

सितंबर माह में फसलें पक कर तैयार

मौसम ने किसानों के साथ दगाबाजी करते हुए हवा आंधी के साथ लगातार बारिश का कहर बरपा कर फसलों को धराशाई कर दिया. किसानों ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस साल प्रकृति ने उनके साथ घिनौना मजाक किया है. पहले कोरोना वायरस की मार उसके बाद प्रकृति के प्रकोप से हाथ में आया हुआ अनाज पानी की भेंट चढ़ गया है. इसके कारण किसानों की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है. अल्पभूधारक किसानों के सामने आत्महत्या के सिवा कोई पर्याय नहीं बचा है. सरकार तत्काल भूमिहीन किसानों की अल्प भूमि किसानों को बिना किसी निकर्ष से तत्काल फसल का पंचनामा कर हर्जाने के तौर पर सामान उपलब्ध कराएं. इस की मांग किसानों द्वारा उठाई गई है.

पिछले वर्ष भी बर्बाद हुई थी फसल

गत वर्ष भी वापसी की बारिश ने जिले में जोरदार नुकसान पहुंचाया था. यह बारिश दीवाली तक चली थी. इस बार भी मौसम का इसी तरह का मिजाज बना हुआ है, जिसके चलते किसान आर्थिक संकट में घिरा हुआ दिखाई दे रहा है. एक बार फिर लगातार बारिश के चलते  उड़द, हरा चना, सोयाबीन, कपास, मूंग ,ज्वार  और मक्का बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई.