अधर में लटके बीएचआर के निवेशक

  • मुख्य आरोपी जांच से कोसों दूर
  • रसूखदारों ने डकार ली करोड़ों की संपत्ति
  • 95000 निवेशकों ने किया था 700 करोड़ निवेश

जलगांव. भाईचंद हीराचंद रायसोनी पत संस्था (BHR) के 95 हजार निवेशकों को किसी प्रकार की राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। सभी निवेशकों को पैसा वापस दिलवाने के लिए प्रशासक नियुक्त किया गया था। प्रशासक जितेंद्र कंडारे ने खुद के साथ राजनेता, उद्योजक और अमीरों का ही भला किया, जिसके चलते निवेशक आज भी अधर में लटके हुए हैं।

प्रशासक ने भी उनकी आशाओं पर पानी फेर दिया। निवेशकों को उनके निवेश से मात्र 30 प्रतिशत पैसा देकर करोड़ों की संपत्ति राजनीतिक रसूखदारों ने मिलकर डकार ली।ऐसा आरोप अब निवेशकों द्वारा लगाया जा रहा है।

बीएचआर एक कॉपरेटिव पतसंस्था थी। फिर भी उसके अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और संचालक मंडल पर भरोसा रखकर लोगों ने अपने खून पसीने की कमाई निवेश की। लगभग 9 राज्यों में बीएचआर के लिए मान्यता मिली हुई थी। इसमें दिल्ली के सहकार विभाग के तहत आनेवाली यह पतसंस्था थी। यही वजह है कि 95 हजार निवेशकों ने लगभग 700 करोड़ इसमें निवेश किया। पतसंस्था के 22 हजार  कर्जदार थे। 2015 में यह पतसंस्था डूबने लगी। इसके चलते निवेशकों को न्याय दिलवाने के लिए प्रशासक के रूप में जितेंद्र कंडारे को नियुक्त किया गया था।

70 प्रतिशत रकम प्रशासक ने की हजम

सहकार विभाग संबंधित होने से कंडारे ने बराबर कर्ज वसूलना शुरू किया था। लेकिन जब निवेशक सरकारी कर्मचारी होने और उनकी उम्र 60 से ऊपर होने की बात कंडारे की समझ में आयी तो उसने निवेशकों को फंसाना शुरू कर दिया। निवेशकों से उसने रसीदें लेकर उन्हें मात्र उनकी अमानत धनराशि से 30 प्रतिशत देकर उन्हें रफा-दफा कर अपना और आकाओं की झोली भर दी। 70 प्रतिशत माल कंडारे और उसके आकाओं ने हजम कर लिया। यह बात अब जांच में सामने आ रही है। वरिष्ठ जमाकर्ताओं या जरूरतमंद जमाकर्ताओं, जिन्हें पैसे की सख्त जरूरत थी, जो प्रशासक तक नहीं पहुंच सकते थे। ऐसे निवेशक संगठन में शामिल हुए और आवाज उठाई। ब्याज नहीं मिला तो चलेगा, पर निवेश की अमानत मिलनी चाहिए। यहां तक इन लोगों ने मांग की। कुछ लोगों को अमानत मिली तो सभी ने संगठन पदाधिकारियों पर विश्वास रखा।

एजेंटों ने भी दिया धोखा

एजेंटों ने भी निवेशकों को धोखा दिया और अपना उल्लू सीधा कर लिया। इनमें से कुछ अभी अपराध शाखा की हिरासत में हैं।वहीं असली आरोपी पुलिस की रेंज से कोसों दूर हैं। जमाकर्ताओं ने सहमति प्रपत्र (स्टांप पेपर) पर कुछ एजेंटों को लिख कर दिया है कि बीएचआर में हमारा इतना पैसा है। इसमें से 20% प्रतिशत रुपये हमारी मर्जी से एजेंटों को देंगे। इसके लिए हमें कोई आपत्ति नहीं है। ऐसे कई दस्तावेज पुणे की टीम को मिले हैं।  इसके आधार पर, यह जांच की जा रही है कि कितने जमाकर्ताओं को जमा राशि से रुपये हजम कर पैसा प्राप्त हुआ है।