आज है विश्वकर्मा जयंती, इन मंत्रों के साथ करें पूजा

    नई दिल्ली : ‘विश्वकर्मा जयंती’ इस दिन का भारतीय परंपराओं में बहुत महत्व है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। इस पूजा को पुरे विधि विधान के साथ किया जाता है, साथ ही यज्ञ भी किया जाता है। आज यानी 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा जयंती है। इस खास अवसर पर हम आपको मंत्रो सहित भगवान विश्वकर्मा की पूजा कैसे करे ये बताने वाले है। तो चलिए जानते है…..

    भगवान विश्वकर्मा की पूजा के लिए समस्त परिवार एक साथ पूजा के लिए बैठे। इसके बाद ब्रम्हांड के पालनकर्ता भगवान विष्णु का ध्यान करें और हाथ में फूल और चावल के अक्षत ले। फिर ”ओम आधार शक्तपे नम: और ओम् कूमयि नम:; ओम् अनन्तम नम:, पृथिव्यै नम:” इस मंत्र को कहते हुए हाथ में लिए हुए अक्षत और पुष्प अपने चारों ओर छिड़के।

    इसके बाद पिली सरसो को छिड़कर चारों दिशाएं बंद कर दें। फिर समस्त परिवार के सदस्य रक्षासूत्र यानी मोली धागा अपने हाथ में बांधे। साथ ही हाथ में लिए पुष्प जलपात्र में छोड़ दें। इसके बाद अपने हृदय में भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें। 

    भगवान विश्वकर्मा का नाम मुख पर लेते हुए पूरी श्रद्धा के दीप जलाएं। जलद्रव्य के साथ हाथ में पुष्प और सुपारी लेकर संकल्प करें। बड़ा में भूमि पर अष्टदल कमल बनाएं। उस स्थान पर साथ विभिन्न तरह के धान्य रखें। और उसपर मिट्टिन या तांबे के बर्तन का जल डालें। इसके बाद पंचपल्लव, सप्त मृन्तिका, सुपारी, दक्षिणा कलश में डालकर कपड़े से कलश का आच्छादन करें। चावल का पात्र समर्पित करें उसके ऊपर विश्वकर्मा भगवान के मूर्ति की  स्थापना करे ओर वरुणदेव का आह्वान करें। 

    भगवान विश्वकर्मा जी को पूर्ण विशवास के साथ पुष्प चजदहते हुए कहें, हे विश्वकर्मा जी, इस मूर्ति में विराजिए और मेरी पूजा स्वीकार कीजिए। इस प्रकार पूजा होने के बाद विविध प्रकार के औजारों को धोएं, उनकी पूजा करे यज्ञ करें। 

    भगवान विश्वकर्मा पूजा मंत्र 

    ओम आधार शक्तपे नम: और ओम् कूमयि नम:; ओम् अनन्तम नम:, पृथिव्यै नम: