भारत का एक ऐसा किला जिस पर अंग्रेज भी नहीं कर पाए कब्जा

    नई दिल्ली: भारत में ऐसे कई पर्यटन स्थल है जो बेहद खास है और कई रहस्यों को अपने भीतर समाये हुए है। इन ऐतिहासिक स्थलों में से एक है हमारी भारत की शान कही जाने वाले किले, जी हां आपने आम तोर पर सभी किलों को देखा होगा या इसके बारे में सुना होगा लेकिन आज हम जिस किले के बारे में आपको बताने जा रहे है उसे बेहद कम लोग ही जानते है। यह एक ऐसा किला है जिसे अंग्रेज भी हासिल नहीं कर पाएं तो चलिए जानते है इस किले के बारे में….

    जिस किले के बारे में हम बात कर रहे है उसका नाम है अजेय किला। जी हां यह किला पूरी दुनिया में अपनी खूबसूरत बनावट के लिए प्रसिद्ध है। भारत के इस प्राचीन किले में कई रोचक कहानियां बसी हुई है। यह किला अपने आप में अनेक रहस्यों को समाया हुआ है। इस अद्भुत और खासियत भरे किले को देखने लाखों पर्यटक यहां चले आते है। यह खबसूरत किला महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड में स्थित है। इस किले को मुरुड जंजीरा (Murud Janjira) किले के नाम से जाना जाता है। तो चलिए जानते है इसके बारे में सबकुछ…… 

    इस किले से अंक 22 की क्या है पहेली 

    यह किले बेहद पहेली भरा है। आपको बता दें कि अरब सागर से बना किला सैलानियों के आकर्षण का केंद्र है। जंजीरा इसके नाम में ही इसकी पहचान और खासियत छिपी है। दरसल अरबी भाषा का शब्द ‘जजीरा’ इसका मतलब होता है टापू। आपको बता दें कि यह किला और यहां का पूरा परिसर पूर्व सिद्दीकी शासकों की राजधानी था। 22 अंक की खानी ये है कि यह किला करीब 22 एकड़ में बना हुआ है और इसके निर्माण में पुरे 22 साल लगे थे साथ ही इसकी सुरक्षा के लिए 22 चौंकिया थी।   

    अजेय नाम का इतिहास 

    जो कभी जीत नहीं सकते उसे कहते है अजेय। इस किले को अजेय किले के नाम से भी जाना जाता है। इतिहासकारों के अध्ययन के मुताबिक पश्चिम भारत का ये एक ऐसा किला था जिसे ब्रिटिश,मुग़ल, पुर्तगाली, भी नहीं जीत पाएं थे। देश के कई राजाओं ने भी इसे जीतने के अनेक प्रयास किये लेकिन इनमे से कोई सफल नहीं हो पाया है। यही वजह से इस 350 साल पुराने किले को अजेय कहां जाता है। यह जंजीरा किला समुद्र तल से 90 फीट ऊंचाई पर बनाया गया है। इस विशाल और अद्भुत किले को देखने एक बार जरूर जाएं। 

    जानें क्यों नहीं जीत पाया कोई यह किला 

    आपको बता दें कि की सुरक्षा के लिहाज से इस किले पर कड़क बंदोबदस्त था। इस किले के दरवाजे भी दीवार के आड़ बनाये गए है। इस वजह से कुछ कुछ मीटर दूर जाने पर यहां के दरवाजे दिखना बंद हो जाते है। यही वजह है की आज तक इस किले को कोई नहीं जीत पाया है। इतिहास के किताबों में बताये मुताबिक 1975-76 एक फ़ारसी शिलालेख में लिखा है कि फाहिम खान ने इस किले को बनवाया था। 

    ऐसा कहां जाता है कि 1618 में सुरुल निजाम ने खुद को जंजीरा रियासत का पहला नवाब घोषित किया था। आपको बता दें कि मुगलों की भी इस किले पर नजर थी। इतिहासकारों के अनुसार शिवाजी महाराज ने भी जंजीरा पर अधिकार जमाने के कई प्रयास किये, लेकिन कामयाब नहीं हुए।  

    पर्यटकों का आकर्षण केंद्र 

    सोचों ऐसी विरासत के पास अगर हम रहे है  तो कितनी ख़ुशी और गर्व महसूस करेंगे। ऐसेही गर्व इस इलाके के आसपास रह रहे लोग करते है। आपको बता दें कि किले में 19 विशाल बुर्ज है। और इनपर उस वक्त की बेहतरीन तोपें लगी हुई है और यह तोपें स्वीडन, हॉलैंड, स्पेन, फ़्रांस से लाई गई थी। ऐसा कहते है कि इस के किले की सुरक्षा के लिहाज से यहां 514 तोपें थी। इनमे  आज भी मौजूद है।  

    मीठे झील का रहस्य 

    आपको बता दें कि इस किले में देखने लायक बहुत कुछ है। उनमे से एक है मीठे पानी की झील। इस किले में 60 फुट गहरे मीठे पानी के छोटे तालाब है। समुद्र के खारे पानी के बिच बना यह तालाब का पानी बहुत मीठा है। लेकिन इस खारे पानी के बीच में बने इस ज़िल का पानी इतना मीठा कैसे है यह एक रहस्य ही है। जिसे आजतक कोई समझ नहीं पाया है। वहां आज भी एक कुआं है जिसका पानी भी मीठा है और यह कुआं आज भी लोगों के काम आता है।