लेटर बम से शिवसेना और एनसीपी में पड़ी दरार, महाराष्ट्र में दोहराया जा सकता है बिहार पैटर्न!

    मुंबई: एंटीलिया मामले (Antilia Case) में रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। जिसके कारण महाराष्ट्र की राजनीति में उबाल आया हुआ है। इसी बीच परमबीर सिंह ने एक लेटर बम फोड़ा है, जिसके कारण राज्य की महाविकास अघाड़ी (Mahavikas Aghadi ) पूरी तरह हिल गई है। इस खुलासे से एक तरफ जहां उद्धव सरकार (Udhav Government) की छवि मिट्टी पलित हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रवादी कांग्रेस (Nationalist Congress Party) और शिवसेना (Shivsena) की छवि को काफी नुकसान पहुंचा है। जिसके वजह से दोनों दलों के बीच दरार आने की संभावना जताई जा रही है,  इस कारण महाराष्ट्र (Maharashtra) में भी बिहार (Bihar) का फॉर्मूला दोहराने की चर्चा शुरू हो गई है। 

    छवि बचाने में जुटी शिवसेना

    मुंबई के पूर्व कमिश्नर के आरोपों से महाविकास अघाड़ी की मुश्किलें बढ़ गई है। सचिन वाझे को लेकर शिवसेना पहले से ही बैकफूट पर है। वहीं अब परमबीर सिंह द्वारा गृहमंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) पर लगाए आरोप के वजह से शिवसेना की छवि को बड़ा नुकसान हुआ, जिसको बचाने के लिए शिवसेना जुट गई है। जिसके बाद अब फिर से भाजपा और शिवसेना गठबंधन की चर्चा शुरू हो गई है। 

    शिवसेना और एनसीपी के रिश्तों में दरार 

    परमबीर सिंह के तबादले को लेकर एनसीपी और शिवसेना के रिश्तों में पहले से ही खटास आई हुई है। शिवसेना सहित खुद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे उन्हें कमिश्नर के पद से हटाने के पक्ष में नहीं थे, वहीं एनसीपी के नेता उन्हें हटाने की मांग कर रहे थे। जब परमबीर का तबादला किया गया तो शिवसेना के नेताओं ने अनिल देशमुख को भी गृहमंत्री के पद से हटाने की मांग शुरू कर दी थी। वहीं अब  पूर्व कमिश्नर के लेटर बंब से एनसीपी की मुश्किलें बढ़ गई है। जिसके कारण दोनों दलों के रिश्तों में दरार आ गई है। 

    सरकार के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह 

    परमबीर ने सिर्फ अनिल देशमुख पर ही नहीं, बल्कि पूरी एनसीपी पार्टी पर आरोप लगाया है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि उन्होंने वसूली की बात की जानकारी शरद पवार और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित देशमुख को दी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अनिल देशमुख को शरद पवार का बेहद ख़ास माना जाता है। जब से एनसीपी बनी है तब से वह उनके साथ हैं। कई ऐसे मौके भी आए जब पवार ने देशमुख को बचाया है। 

    दोनों दलों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू 

    अनिल देशमुख पर लगे आरोप के बाद एनसीपी उनके बचाव में कूद पड़ी है। राज्य सरकार में पार्टी कोटे से मंत्रियों ने कहना शुरू कर दिया है कि, उन्हें फंसने के लिए ये आरोप लगाया गया है। वहीं शिवसेना नेताओं ने बचाव की जगह सवाल उठाने शुरू कर दिया है। जिसके बाद दोनों नेताओं में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। 

    ज्ञात हो कि, 2015 में नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की जेडीयू (JDU) ने आरजेडी (RJD) और कांग्रेस (Congress) के साथ मिलकर महागठबधन (Grand Alliance) बनाकर चुनाव लड़ा और प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। लेकिन 2017 में राज्य के उपमुख्यमंत्री और लालू प्रसाद यादव (Lalu prasad Yadav) के छोटे बेटे तेजस्वी यादव (Tejasvi Yadav) पर भष्ट्राचार के आरोप लगे तो, नीतीश ने आरजेडी को छोड़ फिर से भाजपा के साथ आगए और राज्य में एनडीए की सरकार बनाई।