Genome Sequencing

    सूरज पांडे 

    मुंबई. कस्तूरबा को दान में मिली जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing)(जीसी) मशीन इन दिनों लाल फीताशाही के वजह से अमेरिका के कस्टम (US Customs) में फंसी पड़ी है। यह मशीन कोरोना वायरस के बदलते रूप यानी की नए वेरिएंट (New Variants) की पहचान करने में काफी मददगार साबित होगी, लेकिन पिछले दो महीने से यह मुंबई नहीं आ पा रही है। 

    मुंबई को फिलहाल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) पर निर्भर रहना होता है।  महानगरपालिका यहां से सैंपल भेजती है और लगभग डेढ़ से दो महीने रिपोर्ट आने में लग जाते हैं, क्योंकि एनआईवी पर अन्य जिलों के सैंपल का भार भी होता है। महानगरपालिका  स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उन्हें एक एनजीओ द्वारा करोड़ों रुपए की कीमत की मशीन दान में दी गई है। यह मशीन इंडिया में नहीं मिलती है, इसलिए अमेरिका के शिकागो से यह मशीन आनेवाली है। अब यह मशीन वहां के कस्टम में पिछले कुछ दिनों से पड़ी है, क्योंकि इंटरनेशनल कार्गो उड़ान पर फिलहाल प्रतिबंध की बात कही जा रही है। वैसे भी शिकागो में इनदिनों डेल्टा वेरिएंट के मामले बढ़ रहे हैं, इसको देखते हुए मशीन मुंबई नहीं आ पा रही है। अतिरिक्त महानगरपालिका  आयुक्त सुरेश काकानी ने बताया कि यूएस के कस्टम में मशीन पड़ी हुई है। हम मशीन को जल्द से जल्द मुंबई लाने को लेकर संबंधित विभाग से संपर्क में हैं। 

     3 से 4 दिन में मिलेगी रिपोर्ट

    महानगरपालिका  के स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कस्तूरबा में जीनोम सिक्वेंसिंग शुरू हो जाती है तो जो रिपोर्ट के लिए हमें डेढ़ महीने का इंतजार करना पड़ता है, वो रिपोर्ट हमें 3 से 4 दिन के भीतर मिल जाएगी।  इससे हमें वायरस के वेरिएंट के बारें जल्द जानकारी मिलेगी और हमें आगे की रणनीति बनाने और कोरोना के रोकथाम में काफी मदद मिलेगी। 

    महानगरपालिका  से गए 600 सैंपल

    महानगरपालिका  ने जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए 600 सैंपल भेजे हैं।  यह सैंपल इस बार काउंसिल आफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी को भेजी गई है। दरअसल राज्य सरकार ने उक्त संस्थान के साथ एमओयू किया जिसके तहत राज्य से 4000 सैंपल भेजे जाएंगे।