फूड डिलीवरी बॉयज उड़ा रहे ट्रैफिक नियमों की धज्जियां, 10 से 15 मिनट सहित दिया जाता है समय

    • 10 से 12 घंटे की रहती है ड्यूटी
    • 20 से 30 आर्डर पहुंचने पड़ते हैं तय समय में

    नागपुर. शहर में ऑनलाइन फूड डिलीवरी कम्पनियों के आने के बाद खोमचे वाले से लेकर होटल-रेस्टॉरेंट से होने वाले फूड पार्सल की डिमांड बढ़ गई है. फूड डिलेवरी कम्पनियों की चेन में ठेले पर मिलने वाले चायनीज सहित खाने की थाली में परोसे जाने वाले हर व्यंजन को बनाने वाले जुड़ हुए हैं.

    आसानी से घर बैठे भोजन मिलने की सुविधा को शहर के लोग तेजी से स्वीकार कर रहे हैं. लेकिन वहीं ऑनलाइन ऑर्डर देने पर 10 से 15 मिनट में घर तक नाश्ता व भोजन पहुंचाने की जल्दबाजी में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने वाले विभिन्न एप और कंपनियों के डिलीवरी बॉय के विरुद्ध कार्रवाई करने में ट्रैफिक पुलिस मौन है.

    तेज गति से अपने साथ-साथ दूसरों की जान को जोखिम में डालते हुए वाहन चलाकर नाश्ता व भोजन पहुंचाने के लिए जाने वाले डिलीवरी बॉय को ट्रैफिक पुलिस न ही रोक कर गाड़ी के दस्तावेजों की मांग करती है और न ही चालान की कार्रवाई करती है. एप के जरिए नाश्ता, भोजन और केक बुक करने वालों को जल्द डिलीवरी पहुंचाने के लिए वाहन चलाते समय लगातार ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करते हुए देखा जा सकता है.

    आर्डर के अनुसार होता है पेमेंट स्ट्रक्चर

    सूत्रों के अनुसार इन आनलाइन फूड कंपनियों द्वारा डिलीवरी बॉय के पेमेंट स्ट्रक्चर को इस तरह से बनाया जाता है कि वह जल्द से जल्द ऑर्डर डिलीवर करने की फिराक में रहते हैं, जिससे अधिक से अधिक पैसे कमाए जा सकें और इसके लिए वह ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कर अपनी और सड़क पर अन्य लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करते हैं. इस तरह से नियमों की अनदेखी करने किये जाने पर ट्रैफिक पुलिस को इन ऑनलाइन नाश्ता व भोजन, केक पहुंचाने वाली कंपनियों के संचालकों के विरुद्ध भी नोटिस जारी किया जाना चाहिए.

    उन्हें नोटिस जारी करके ट्रैफिक नियमों की पालना के लिए हिदायत दी जानी चाहिए. कई बार पुलिस नियमों को तोड़ने वालों पर कार्रवाई भी करती है, लेकिन इसके बावजूद कुछ नहीं बदलता. फूड डिलीवरी बॉय समय पर पहुंचने और ज्यादा आर्डर करने के चक्कर में नियमों की धज्जियां उड़ाना शुरू कर देते हैं.

    अधिक कमाने की रहती है प्रतिस्पर्धा

    डिलीवरी बॉय के बीच भी अधिक से अधिक पैसे कमाने को लेकर प्रतिस्पर्धा रहती है. जितने अधिक आर्डर मिलेंगे और उन्हें जितनी जल्दी कवर किया जायेगा, उतना अधिक पैसा मिलने की होड़ में वे अपनी और दूसरों की जिंदगी को खतरे में डालते हैं. लोगों के बीच लोकप्रियता हासिल करने के लिए कंपनियों द्वारा तय किया गया लक्ष्य पूरा करने के लिए कम्पनियां डिलीवरी बॉयज को समय कवर करने कहती हैं. तय समय पर सामान पहुंचाने की पाबंदी और वेतन कटने के डर से वे जिंदगी की परवाह किए बगैर तेज रफ्तार में फर्राटा भरने को मजबूर हैं.

    इसी जल्दबाजी में कुछ डिलीवरी बॉय हादसों के शिकार भी हो चुके हैं. इसके बावजूद इनसे काम लेने वाली कंपनियों के पास न तो इनकी सिक्यॉरिटी का प्लान है और उनके पीछे छूटे परिवारजन की मदद की कोई योजना है. ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियां जल्द से जल्द ऑर्डर पहुंचाने का दावा करती हैं. कंपनियों के बीच चल रही यही होड़ डिलीवरी बॉय के लिए आफत साबित हो रही है.

    दिया जाता है इंसेंटिव का लालच

    वक्त पर ऑर्डर पहुंचाने के लिए कंपनियां डिलीवरी बॉय को इंसेंटिव का लालच देती हैं. इसी लालच में बाइक पर डिलीवरी करने वाले युवक ट्रैफिक नियमों तक की परवाह नहीं करते. एक कर्मचारी के अनुसार तय वक्त पर सामान पहुंचाने के लिए वे अक्सर ट्रैफिक में अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं. कम्पनियां 10 से 12 घंटे ड्यूटी करवाती हैं और तय समय सीमा में रोज करीब 20 से 30 ऑर्डर वक्त पर पहुंचाने होते हैं. अगर डिलीवरी में देर हुई तो कंपनी पगार से ही जुर्माना काट लेती है.