Wasankar Scam

  • 750 निवेशकों को लगाया है चूना
  • 127 करोड़ से अधिक की वित्तीय धांधली

नागपुर. वासनकर वेल्थ मैनेजमेंट कम्पनी द्वारा की गई धोखाधड़ी उजागर होने के बाद निवेशकों की ओर से अंबाझरी थाना में शिकायत दर्ज कराई गई. पहले भी जमानत की याचिका ठुकराए जाने के बावजूद अब चौथी बार कम्पनी के डायरेक्टर विनय वासनकर की ओर से हाई कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की गई. याचिका पर दोनों पक्षों की ओर से लंबी दलीलों के बाद हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिर एक बार जमानत देने से साफ इंकार कर दिया. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि इसके पूर्व भी मेरिट के आधार पर जमानत अर्जी ठुकराई गई है. अब मेरिट के आधार पर नहीं, बल्कि निचली अदालत में सुनवाई को लेकर हो रही देरी को लेकर अर्जी दायर की गई है. जबकि याचिकाकर्ता गत 7 वर्षों से जेल की सलाखों के पीछे है. याचिकाकर्ता की ओर से अधि. देवेन चौहान और सरकार की ओर से सहायक सरकारी वकील अधि. संगीता जाचक ने पैरवी की.

निचली अदालत में 22 बार सुनवाई स्थगित

सुनवाई के दौरान अधि. चौहान ने कहा कि हाई कोर्ट ने गत समय 6 माह के भीतर सुनवाई खत्म करने के आदेश जिला सत्र न्यायालय की विशेष अदालत को दिया था. आलम यह है कि उसके बाद से अब तक सुनवाई की केवल खानापूर्ति हो रही है. सरकारी पक्ष की ओर से निचली अदालत में 22 बार सुनवाई स्थगित करने की मांग की गई है. इससे लगातार सुनवाई टलती रही है. सुनवाई में हो रही देरी के कारण अभियुक्त गत 7 वर्षों से जेल में है. सरकारी पक्ष की ओर से बताया गया कि कोरोना महामारी की विपदा के कारण और निचली अदालत में सरकारी पक्ष रखने वाले सरकारी वकील कोरोना पॉजिटिव आने से सुनवाई पर असर पड़ा है. इसके अलावा इसमें 22 आरोपी हैं जिनके लिए अलग-अलग वकील खड़े होते हैं. प्रत्येक वकील गवाहों के बयान दर्ज कराता है. एक गवाह के बयान दर्ज करने में 8-8 घंटे का समय लगता है जिससे याचिकाकर्ता द्वारा लगाया गया आरोप पूरी तरह निराधार है.

50,000 पन्नों की चार्जशीट

सुनवाई के दौरान अदालत का मानना था कि क्या सरकारी वकील पॉजिटिव आने से दूसरा कोई सरकारी वकील पैरवी नहीं सकता है? जिस पर सरकारी पक्ष की ओर से बताया गया कि इस मामले को लेकर जांच एजेन्सी ने 50,000 पन्नों की चार्जशीट दायर की है. निचली अदालत में सरकारी पक्ष रखनेवाले वकील का इस पर अध्ययन है, जबकि दूसरे वकील को इसकी भलीभांति जानकारी नहीं है. हालांकि कुछ समय दूसरे सरकारी वकील ने भी पैरवी की. किंतु कुछ ही समय तक सुनवाई टाली गई है. इसके अलावा 2 आरोपी अभी भी फरार है. सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने उक्त आदेश जारी किए.