Nagpur High Court

    नागपुर. मराठा आरक्षण के कारण सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं ले पाए खुले वर्ग के छात्रों को निजी मेडिकल कॉलेज में ट्यूशन फीस अदा करने का आश्वासन देते हुए राज्य सरकार की ओर से 20 सितंबर 2019 को अधिसूचना जारी की गई थी. अधिसूचना का पालन नहीं किए जाने को लेकर आयुष पावडे और अन्य 14 छात्रों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया  था.

    याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पैरवी कर रहे सरकारी वकील ने कहा कि फीस प्रतिपूर्ति के लिए सरकार के महाडीबीटी पोर्टल पर छात्रों की आईडी तैयार की जा रही है. इसके लिए कुछ समय देने का अनुरोध अदालत से किया गया. सुनवाई के बाद न्यायाधीश सुनील शुक्रे और न्यायाधीश अनिल किल्लोर ने 3 सप्ताह का समय देकर सुनवाई स्थगित कर दी. गत समय सरकार की ओर से बताया गया था कि इस तरह के 106 मेडिकल छात्रों को फीस की प्रतिपूर्ति जल्द ही की जाएगी. 

    सरकार पर पड़ेगा 35 करोड़ का बोझ

    सरकारी पक्ष का मानना था कि 9 अक्टूबर 2020 को नया जीआर जारी किया गया है. निजी मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले इन खुले वर्ग के छात्रों को ट्यूशन फीस की प्रतिपूर्ति के लिए सरकार पर लगभग 35 करोड़ का बोझ पड़ेगा. हालांकि हाई कोर्ट की ओर से गत समय आदेश तो जारी किए गए लेकिन अब तक निधि का भुगतान नहीं हो पाया है. अदालत ने ट्यूशन फीस का भुगतान होने में देरी के लिए छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं करने के आदेश यथावत रखने को कहा था. याचिकाकर्ता छात्रों का मानना था कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में लगने वाले शुल्क जितनी राशि उन्हें देना है. जबकि बची राशि का भुगतान राज्य सरकार को करना है. लेकिन अब तक भुगतान नहीं होने से निजी मेडिकल कॉलेज प्रबंधनों की ओर से छात्रों को परेशान किया जा रहा है. 

    8 लाख का किया जा चुका है भुगतान

    याचिकाकर्ता छात्रों का मानना था कि निजी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश ले चुके खुले वर्ग के छात्रों को शैक्षणिक वर्ष 2019-20 के लिए अतिरिक्त शुल्क का भुगतान किया जाना था. हालांकि शैक्षणिक वर्ष को देखते हुए छात्रों की ओर से निजी मेडिकल कॉलेज की पूरी फीस 8 लाख रु. तो भर दी गई लेकिन सरकार की ओर से एक पाई तक नहीं मिली है. सभी 106 छात्रों को 4 वर्ष के शैक्षणिक वर्ष के लिए लगभग 35 करोड़ की आवश्यकता होगी. अब दूसरे वर्ष के लिए कॉलेजों की ओर से फीस की डिमांड शुरू हो गई है.