Professor Saibaba's mother guilty of ties to Maoists dies

नागपुर. माओवादियों से संबंधों के चलते महाराष्ट्र की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जी.एन. साईबाबा की मां का निधन हो गया और वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मां को देखने की अनुमति मांगने का उनके वकील का अंतिम प्रयास भी विफल रहा। उनकी 74 वर्षीय मां कैंसर से पीड़ित थीं। मंगलवार को बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने साईबाबा की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसमें उन्होंने चिकित्सा आधार पर 45 दिन के लिए रिहाई की मांग की थी ताकि वह बाहर अपना उपचार करा सकें और अपनी मां से मिल सकें। साईबाबा की पत्नी ने एक वक्तव्य में कहा कि उनकी सास का शनिवार को हैदराबाद में निधन हो गया।

माओवादियों से संबंधों के दोषी साईबाबा को 90 फीसदी दिव्यांगता है और वह व्हीलचेयर से चल पाते हैं। वह नागपुर के केंद्रीय कारागार में बंद हैं। उनके वकील आकाश सरोदे ने पीटीआई-भाषा को रविवार को बताया कि उन्होंने शुक्रवार को ईमेल के जरिए नागपुर जेल के अधिकारियों को सूचित किया था कि साईबाबा की मां की हालत नाजुक है और वह अपने बेटे को देखना चाहती हैं। सरोदे ने बताया कि उन्होंने जेल अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंस सुविधा की व्यवस्था करने का अनुरोध किया था ताकि साईबाबा अपनी बीमार मां को देख सकें लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

मां की मौत के बाद उन्होंने जेल अधिकारियों से साईबाबा से परिजनों की फोन पर बात कराने का भी अनुरोध किया लेकिन इसका भी कोई जवाब नहीं दिया गया। साईबाबा की पत्नी वसंता ने बताया कि उनकी सास अपने सबसे बड़े बेटे से मिलना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि साईबाबा भी बीते चार साल से मां से नहीं मिल पाए थे। उन्होंने बताया कि साईबाबा की मां कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं थीं। मार्च 2017 में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले की सत्र अदालत ने साईबाबा और चार अन्य को माओवादियों से संबंधों तथा ‘‘देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने” जैसी गतिविधियों में लिप्त होने का दोषी पाया था।(एजेंसी)