Repair not done in the way of metro construction, road uprooted from place to place

  • .क्या ट्रैफिक भी हाई कोर्ट सुधारेगा
  • मनपा और ट्रैफिक विभाग में नहीं तालमेल

नागपुर. संपूर्ण विश्व में अच्छी सड़कों का निर्माण यातायात सुचारू और नागरिकों के चलने के लिए बनाया जाता है, लेकिन ऑरेंज सिटी में करोड़ों की लागत से बनाई गई सीमेंट की सड़क वाहन चालकों के लिए नहीं बल्कि उसे बार-बार तोड़ने के लिए बनाई जाती है. मनपा, पीडब्ल्यूडी विभाग, ट्रैफिक विभाग, महावितरण, जलापूर्ती विभाग में किसी भी प्रकार का तालमेल नहीं होने के कारण नई सड़कों को नाली, ड्रेनेज लाइन, बिजली लाइन, केबल लाइन बिछाने के नाम तोड़ा जा रहा हैं. जो आम व्यक्ति दिन रात मेहनत कर इमानदारी से टैक्स दे रहा है, उसके करोड़ों रूपये प्रशासन इस प्रकार बर्बाद कर रहा है.

कोई भी विभाग या कम्पनी कहीं भी सड़क की खोदाई शुरू कर देती है, लेकिन संबंधित प्रशासन उन पर कोई कार्रवाई नहीं करता. किसी भी काम को लेकर टैफिक और मनपा के विभिन्न विभागों में कोई नियोजन नहीं है. इसका खामियाजा आम नागरिकों को अपनी जान गंवा कर देना पड़ रहा है. आम जनता का कहना है कि कौनसा काम कब और कितने समय में किया जाए यह बताने के लिए भी अब क्या हाई कोर्ट को सड़कों पर उतरना पड़ेगा. 

क्यो नहीं होती कार्रवाई
मानकापुर रिंग रोड, मानेवाड़ा रिंग रोड, कलमना रोड, नंदनवन सीमेंट रोड, शताब्दी चौक, हिंगना रिंग रोड, समेत ऐसे कई मार्ग है जहां हालही में सड़क का सीमेंटीकरण का कार्य पूरा हुआ हैं, लेकिन इन मार्गों पर कई स्थानों पर बनी बनाई सड़क को तोड़कर नल लाइन, केबल लाइन और ड्रेनेज लाइन का काम किया जा रहा है.  कुछ दिन पहले प्रतापनगर चौक के आगे केबल के लिए नाली डालने के लिए क्रांक्रिट को रोड को मशीनों से तोड़ा गया. इसके पहले नाला बनाने के लिए छत्रपति चौक के समीप सीमेंट रोड को तोड़ा जा चुका है. इसके अलावा अन्य मुख्य मार्गों का भी यही हाल हैं. बावजूद इसके किसी भी ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं होती. 

महीनों तक नहीं बुझाते गड्ढें
वैसे तो किसी भी विभाग के ठेकेदार को सड़क को खोदने से पहले मनपा के बांधकाम विभाग से अनुमती लेनी होती है. इसके लिए विभाग के पास कम्पनी को कुछ पैसे डिपॉजिट करने होते है, लेकिन अनुमती लेकर काम करने की प्रथा केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है. वास्तवीकता में इस नियम पर कोई ठेकेदार अमल नहीं करता. हर कोई अपने मन मुताबिक कहीं भी गड्ढा खोदकर काम कर लेता है.

काम होने के बाद कई महिनों तक गड्ढों को बुझाया भी नहीं जाता इस दौरान कई वाहन चालक गड्ढें में गिरकर अपनी हड्डीयां तुड़वा देते है. अंत: गड्ढों को बूझाने में भी लापरवाही बरती जाती है. गट्टु लगाकर एक लेवल में करने के बजाए ठेकेदार पैसे और समय बचाने के लिए कांक्रिट का मिक्चर फैला देता है. इससे सड़क का लेवल उपर नीचे हो जाता है. निम्न दर्जे के काम के कारण कुछ ही देनों में फिर से उस जगह पर गड्ढा बन जाता है.

कार्य के पहले योजना की जरूरत
इस प्रकार के खोदकाम को लेकर मनपा और ट्रैफिक विभाग में कोई तालमेल नहीं रहता है. अचानक किसी भी सड़क पर खोदकाम शुरू किये जाने के कारण उस परिसर की यातायात बूरी तरह प्रभावीत हो जाती है. न तो मनपा के अधिकारी जानकारी देते है और न ही ट्रैफिक पुलिस समय पर यातायात व्यवस्था पर कोई नियोजन करती है. यदि एक-दो बार योजना बनाते भी है तो उन्हें अमल में नहीं लाया जाता. किसी भी प्रकार की निर्माण कार्य को लेकर संबंधित विभाग को योजना बनाकर काम करना चाहिए.

निर्माण कार्य के पहले ट्रैफिक विभाग को हर परिसर के मुख्य मार्ग पर पर्यायी मार्ग की जानकारी जनता को देनी चाहिए. प्रशासन केवल सिविल लाइन्स, सीताबर्डी, वेस्ट हाई कोर्ट रोड जैसे पॉश इलाकों में यातायात संबंधित समस्या होने पर ही जानकारी देता है लेकिन अन्य क्षेत्रों में निर्माण कार्यों के दौरान उन्हें पर्यायी मार्ग की कोई जानकारी प्रदान नहीं की जाती.