What secrets of Corona is China hiding Dragon trying to stop finding out the source of the virus

  • शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से मिले मेडिकल बिल की राशि

नागपुर. महाराष्ट्र राज्य शिक्षक परिषद ने स्कूल शिक्षा विभाग और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर कोविड-19 से संक्रमित हुए शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों के मेडिकल बिल का भुगतान तत्काल प्रभाव से करने की मांग की. स्वास्थ्य विभाग द्वारा 17 दिसंबर को कोरोना को गंभीर बीमारियों की सूची में शामिल किया गया. हालांकि इसमें उल्लेख किया गया है कि यह आदेश 2 सितंबर से पूर्वव्यापी प्रभाव के साथ लागू किया गया है. लेकिन शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों को जून से सप्ताह में 2 दिन अपनी उपस्थित दर्ज कराने के लिए मजबूर किया गया था. स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारी 2 सितंबर से बड़ी संख्या में कार्यालय में आने लगे थे इसलिए 2 सितंबर से जीआर लागू किया गया है. लेकिन शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी पहले से ही अपनी ड्यूटी पर थे.

लॉकडाउन के समय से हो लागू

राज्य शिक्षक परिषद ने कहा कि इसके अलावा उन्हें कोविड-19 की ड्यूटी भी दी गई थी. इसके कारण उनमें से कई कोरोना संक्रमित हुए और कुछ की मौत हो गई. परिषद ने सरकार से उन्हें और उनके परिवार को मेडिकल बिल से वंचित नहीं रखने का अनुरोध किया. मुंबई में मार्च से ही कोरोना का प्रादुर्भाव बढ़ने लगा था. इससे हजारों कर्मचारी संक्रमित थे जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. निजी अस्पताल ने कोरोना की आड़ में मरीजों के इलाज का लंबा-चौड़ा बिल बनाकर उन्हें लूटते थे. इस दौरान कमचारियों को भारी वित्तीय बोझ उठाना पड़ा. अस्पताल का बिल चुकाने के लिए कर्मचारियों द्वारा कर्ज लिया गया. चूंकि कोरोना वायरस मार्च से शुरू हुआ, इसलिए लॉकडाउन लगने के समय से ही सभी कर्मचारियों के कोविड के मेडिकल बिल का भुगतान किया जाना चाहिए.

बिना शर्त मिले प्रमाणपत्र

परिषद ने कहा कि 2 सितंबर पूर्वव्यापी प्रभाव की तारीख होगी जो प्रभावित कर्मचारियों के लिए अनुचित होगी. इसलिए कोरोना महामारी के लिए मेडिकल बिल को उस तारीख से अनुमोदित किया जाना चाहिए, जिस दिन से राज्य में लॉकडाउन लगाया गया था. आदेश जारी होने के बाद से कई शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी शिक्षकों की यूनियनों से भी यही मांग कर रहे हैं. इसके अलावा परिषद ने मांग की कि मेडिकल बिल के भुगतान करते समय रोगी का ऑक्सीजन स्तर क्या था, इस शर्त के बिना संक्रमित कर्मचारियों को उचित मेडिकल प्रमाणपत्र दिया जाए.