Protest

    नागपुर. राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा लॉकडाउन के ताजा आदेश का खुलासा होने के बाद व्यापारियों का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. सोमवार को शहर के अनेक इलाकों में व्यापारी रास्ते पर उतर आए और अपनी दूकानें शुरू करने की जिद करने लगे. सदर, इतवारी और मंगलवारी में दिन के समय बड़ी संख्या में व्यापारी बाजारों में जमा हो गए. कुछ स्थानों पर उनकी एनडीएस दस्ते व पुलिस कर्मियों के साथ कहासुनी भी हो गई. दरअसल, रविवार रात को जारी गाइडलाइंस को लोग समझ नहीं पाए थे. सभी को लग रहा था कि केवल वीकेंड पर कड़क लॉकडाउन रहेगा. बाकी दिन दूकानें शुरू रहेगी.

    सोमवार को जब हकीकत सामने आई तो व्यापारियों की त्योरियां चढ़ गई. उनका कहना है कि ले देकर उन्हें ही टार्गेट बनाया जाता है. कोरोना के प्रसार के लिए केवल वहीं जिम्मेदार नहीं है. जब ट्रेन, बस, विमान, सरकारी ऑफिस, किराना, सब्जी की दूकानें शुरू है तो बाकी व्यापारियों के पेट पर क्यों लात मारी जा रही है. व्यापारियों का यह भी कहना है कि अप्रैल-मई में शादियों का सीजन होता है. पिछला सीजन तो हाथ से निकल गया था कम से कम इस दौरान उन्हें कमाई का मौका मिलना चाहिए. उनकी दूकानों में उनके परिवार के अलावा अन्य कर्मचारियों की रोजी-रोटी भी चलती है.

    दिया 72 घंटे का अल्टीमेटम

    इस बीच राज्य के व्यापारियों की शीर्ष संस्था चेंबर ऑफ एसोसिएशन्स ऑफ महाराष्ट्र इंडस्ट्री एंड ट्रेड ने राज्य सरकार को बाजार, दूकान, मॉल आदि बंद रखने के अपने निर्णय पर दोबारा विचार करने के लिए 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया. ऑनलाइन बैठक में राज्य के विभिन्न शहरों के व्यापारिक संगठन शामिल हुए. अध्यक्ष दीपेन अग्रवाल  सरकार को चेतावनी दी कि यदि 8 अप्रैल तक शाम तक कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो व्यापारी तीव्र आंदोलन के लिए मजबूर हो जाएंगे. 

    सड़कों पर हुजूम, नियमों की उड़ी धज्जियां

    दूकानें शुरू करने के लिए दूकानदार सड़कों पर जमा हो गए. इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का सरासर उल्लंघन होता नजर आया. इतवारी शहीद चौक में जमा भीड़ को देखकर कहीं से लॉकडाउन नजर नहीं आ रहा था. रोज की तरह भीड़ उमड़ रही थी. मास्क लगाने के बावजूद लोग एक दूसरे से सटकर खड़े थे. दूकानदारों की बड़ी संख्या के आगे पुलिस भी बेबस नजर आई. दूकानदारों के साथ-साथ तमाशा देखने वाले भी भीड़ का हिस्सा बन रहे थे.