Corona virus: 34 home death investigations so far, 3 positive, 31 negative

नाशिक. जीने के लिए पूरा जीवन संघर्ष करने के बाद आखिर में मरने के बाद दफन होने के लिए लगने वाली दो गज जमीन के लिए बड़ा संघर्ष करने का समय मुस्लिम समुदाय के कोरोना संक्रमित मृतकों पर आ गया है. कोरोना के डर से पहले निजी कब्रिस्तान में विधि के लिए जगह नहीं थी तो शहर में शासन की ओर से मनपा का कब्रिस्तान न होने से दफनाने के लिए जगह पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा. कई जनजागृति के बाद भी अब तक स्थिति में बदलाव नहीं आया है. 

पिछले 8 माह कोरोना बाधित व संदिग्ध 198 की हुई मौत

पिछले 8 महीनों में मुस्लिम समाज के कोरोना बाधितों में से उपचार के दौरान 185 और 49 कोरोना संदिग्ध, इस प्रकार कुल 198 लोगों की मौत हो गई. कोरोना के डर से निजी कब्रिस्तानों में लाशों को निजी दफन विधि के लिए दो गज जमीन मिलना भी कठिन हो गया था. सामाजिक कार्यकर्मा रिजवान खान ने मुस्लिम धर्मगुरु और समाज के प्रतिष्ठित लोगों की बैठक लेकर कोरोनाग्रस्तों को दफनाने को लेकर जनजागृति का प्रयत्न किया. उसके बाद शहर के सभी कब्रिस्तानों में कोरोना से मारे गए मुस्लिम बंधुओं को दफनाना शुरू किया गया. 

अधिकांश दफन विधि पुराने नाशिक के कब्रिस्तान में हुई

अधिकांश दफन विधि शहर के केंद्रीय पुराने नाशिक इलाके के कब्रिस्तान में हुई. दफनाने की जगह की समस्या खत्म होने के बाद दफनाएगा कौन, ऐसा प्रश्न खड़ा हो गया. मरने वालों के रिश्तेदारों को कोरोना संक्रमण का डर और परिवार में संक्रमण को रोकने के लिए उन्हें लाश के करीब नहीं जाने दिया जाता है. ऐसे समय में रिजवान खान, फिरोज शेख, रफीक साबिर, आसिफ शेख, मुबीन पठान, तनवीर बिस्मिल्लाह, जहीर शेख, अकरम शेख और अन्य साथियों ने कोरोना संक्रमित मृतकों को दफनाने की जिम्मेदारी ली. 

2 दफनाने वालों को भी कोरोना ने घेरा

इस काम में रफीक साबिर भी कोरोना से संक्रमित हो गए. रिजवान खान को भी कोरोना के लक्षणों ने घेर लिया. उन्हें भी कुछ दिनों के लिए संदिग्ध मान कर क्वारंटाइन कर दिया गया. उपचार के बाद दोनों फिर से मृतकों को दफनाने के काम में जुट गए. पुराने नाशिक में जहांगीर, रसूलबाग, काजी, खतीब, शाहजहानी, वडालागांव कब्रिस्तान, सातपुर में गौसिया रजविया, गवलाणे के मनपा कब्रिस्तान में इस मंडल ने कई मृतकों को दफन किया. सातपुर के कब्रिस्तान में 5 मृतकों को दफनाया गया. ख्रिस्ती समाज में भी 19 लोगों की कोरोना से मौत हुई. उन्हें भी इस ग्रुप ने सारडा सर्कल स्थित कब्रिस्तान में दफन किया. वहां सतीश म्हसके और विशाल म्हसके ने भी उनका साथ दिया.

महीना         मरीज              संदिग्ध            कुल मौत

मई                04                         01                05

जून               34                         24                58

जुलाई            41                         14                55

अगस्त            26                         02                28

सितंबर           28                         06                34

अक्टूबर          08                         08                16

नवंबर            04                         01                05

कर्तव्य समझ निभाई रिश्तेदारी

कोरोना के शुरुआती दिनों में मृतकों को दफनाने के लिए भी लोग डरते थे. मरने वाले के रिश्तेदार पहले ही संक्रमण से डरे रहते थे और उन्हें लाश से दूर रखा जाता था. मरने वालों की इस दुर्दशा को देखते हुए हमने सोचा कि किसी को भी तो यह जिम्मेदारी निभानी होगी और हमने उसे अपना कर्तव्य समझकर पूरा किया. 

-रिजवान खान, समाजसेवक