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    नाशिक. प्रशासन के बार-बार कहने के बावजूद कोरोना पीड़ितों की संख्या पिछले 8 दिनों से बढ़ रही है, नाशिक (Nashik ) के कई निवासी अभी भी कोरोना (Corona) निषेध नियमों (Rules) का उल्लंघन कर रहे हैं। शहर के मुख्य बाजारों, उपनगरीय बाजारों, सब्जी मंडियों, बस स्टैंड सहित पर्यटन स्थलों पर बढ़ रही भीड़ से संक्रमण बढ़ने के संकेत हैं। एक तरफ शहर में न ही कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं है, वहीं बिना मास्क के घूमने वाले भी कई लोग देखे जा रहे हैं। 

    केवल इतना ही नहीं बल्कि सेनिटाइज़र का उपयोग इतना कम हो गया है कि नाशिक निवासियों को ‘सुधर जाओ’ कहने का समय आ गया है। शहर में भले ही रात में कर्फ्यू लगा दिया गया हो, लेकिन दिन में नियमों का पालन नहीं किया जाता है तो नाशिक में कोरोना मरीजों की संख्या में वृद्धि के स्पष्ट संकेत हैं। 

    मरीजों की संख्या में इजाफा

    जिले और शहर में कोरोना मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि के बावजूद नाशिक निवासियों ने रविवार को महसूस किया कि वे स्वास्थ्य के बारे में गंभीर नहीं थे। रात्रिकालीन कर्फ्यू के कारण कई लोगों ने लॉकडाउन के डर से शाम 5 बजे के बाद किराने और आवश्यक सामान खरीदने में जुट गए। पुलिस की गश्त के बावजूद नागरिकों में ज्यादा भय नहीं देखा गया। शहर का मेनरोड मुख्य बाजार, आकाशवाणी सब्जी बाजार, बोट क्लब, सोमेश्वर मंदिर, धबधबा, ठक्कर बाजार बस स्टैंड और रामकुंड क्षेत्र कहीं भी लोगों में कोरोना के भय से सोशल डिसटेंसिंग रखते नहीं देखा गया। सेनिटाइज़र का उपयोग भी लोग नहीं कर रहे हैं। किसी भी दुकान या कार्यालय में थर्मल बंदूकें नहीं देखी गईं। कई ने मास्क नहीं पहने थे। 

    नियमों से ‘सुरक्षित दूरी’

    रविवार के बाजारों के साथ ही शहर में फेरीवालों, सब्जी विक्रेताओं, दुकानों, स्टालों, बस स्टैंड, पर्यटन स्थलों आदि पर भीड़ देखी गई। कई लोग सड़क पर थूकते देखे गए। इसलिए, नियमों से ‘सुरक्षित दूरी’ रखने वाले नाशिक निवासियों का गंभीर मुद्दा सर्वेक्षण में सामने आया। इसलिए यदि अगले चरण में नाशिक निवासियों की समान उदासीनता जारी रहती है, तो कोरोना के प्रकोप को होने में अधिक समय नहीं लगेगा। इसलिए नाशिक निवासियों को प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की आवश्यकता है।

    शहर में देखी जा रही लापरवाही 

    • बस स्टॉप पर सेंनिटाइजर नहीं।
    •  दुकानों में नहीं लगे हैं नोटिस बोर्ड।
    • बच्चों के चेहरे पर मास्क नहीं।
    • बिना कारण के सड़कों पर थूकना।
    • कोरोना में कमी आने की नागरिकों में भ्रम की स्थिति।
    • पर्यटन स्थलों में चहल-पहल, नियमों का खुला उल्लंघन।