संभालना है सरकारी रिकॉर्ड, मांगा जा रहा भगवान राम का आधार कार्ड

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, उत्तरप्रदेश के बांदा जिले में राम-जानकी मंदिर है. भगवान राम के नाम पर 7 हेक्टेयर जमीन है. इस जमीन में जो गेहूं पैदा होता है, उसे बेचकर मिलने वाली पैसे से मंदिर की देखभाल, मरम्मत, पूजा-आरती-प्रसाद का खर्च चलाया जाता है. अब तक मंदिर के महंत राजकुमार दास ऐसा ही करते आ रहे थे लेकिन अब नियमों का हवाला देते हुए उपविभागीय दंडाधिकारी सौरभ शुक्ला ने कहा कि जिनके नाम पर जमीन है उनका आधार कार्ड रहना  चाहिए. इसलिए भगवान राम का आधार कार्ड लाओ नहीं तो मंदिर का गेहूं बेचने की अनुमति नहीं दी जाएगी.’’

    हमने कहा, ‘‘यह तो बड़ी विचित्र बात है. भगवान तो खुद संपूर्ण जगत के आधार हैं. ऐसे ब्रह्मांड नायक का आधार कार्ड क्यों मांगा जा रहा है. प्रभु तो खुद अपने निराधार भक्तों को कृपापूर्वक आधार देते हैं. लोग भजन गाते हैं- मेरे तो आधार सीताराम के चरणारविंद!’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, आस्था अपनी जगह है और सरकारी नियम अपनी जगह! भगवान राम को अपने मंदिर की जमीन का गेहूं बेचना हैं तो आधार कार्ड पेश करना ही पड़ेगा. आजकल आधार कार्ड- पैनकार्ड की जरूरत हर जगह पड़ती है. उसे बैंक खाते से लिंक करना पड़ता है.’’ हमने कहा, ‘‘भगवान राम के त्रेतायुग में यह सारी चीजें नहीं थीं. प्रभु राम ने तो हर निराधार को खुद ही आधार दिया है.

    निराश्रित हो चुके सुग्रीव और विभीषण को राम ने ही राजगद्दी दिलाई. गीतावली में कहा गया है- जो संपदा शिव रामनहिं दीन्ह दिए दस माथ, सोई संपदा विभीषन ही सकुची दीन्ह रघुनाथ अर्थात जो संपत्ति शिव ने रावण को 10 सिर अर्पण करने के बाद दी थी वही संपत्ति भगवान राम ने सकुचाते हुए विभीषण को दे दी. इतने उदार हैं भगवान राम!’’ पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, यह सारी बातें अपनी जगह हैं लेकिन आज के जमाने में डिजिटल तरीके से लेनदेन होता है. डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर या डीवीटी से खाते में रकम जमा होती है. सरकारी अधिकारी भगवान का क्रेडिट-डेविट कार्ड और बैंक आकउंट नंबर भी मांग सकते हैं. इसलिए मंदिर के महंत भगवान राम की मूर्ति या विग्रह की तस्वीर खींचकर उनका आधार कार्ड बनवा लें. उनके आवेदन पत्र में पिता का नाम दशरथ, मां का नाम कौसल्या, जन्म स्थान अयोध्या और डेट आफ बर्थ में चैत्र रामनवमी त्रेतायुग जैसा विवरण डाल सकते हैं.’’