खट्टर की राय अजीब हरियाणा में होते हैं हैसियतदार गरीब

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, (Nishanebaaz) हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) के विचार लीक से हटकर और हैरत में डालने वाले हैं. उन्होंने विधानसभा (Haryana Vidhan Sabha Budget session) में बजट प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान कहा कि हम 1 लाख 80 हजार रुपए वार्षिक आय वाले हर व्यक्ति को गरीब की श्रेणी में रखेंगे, भले ही उसके पास कार या 4 मंजिला पक्का मकान हो.’’ हमने कहा, ‘‘यह है गरीबी को देखने-समझने और परखने का नया नजरिया. समय के साथ पैमाने बदल जाते हैं. जब 1952 के पहले आम चुनाव के बाद लोकसभा बनी तो उसमें गरीबी को लेकर प्रधानमंत्री नेहरू और समाजवादी नेता डा. राममनोहर लोहिया के बीच तीखी बहस हुई थी.

    नेहरू का दावा था कि गरीब की कमाई रोज 15 आना है जबकि लोहिया का कहना था कि गरीब को 3 आने रोज से घर चलाना पड़ता है. यह उन दिनों की बात है जब 1 रुपए में 16 आने या 64 पैसे हुआ करते थे. उस जमाने में सारा मोहल्ला घूमने पर भी किसी के पास 100 रुपए का खुदरा या चिल्लर नहीं मिलती थी. तब कांग्रेस की मेंबरशिप के लिए सिर्फ चवन्नी (चार आने का सिक्का) देना पड़ता था.’’ पड़ोसी ने कहा, निशानेबाज, पुरानी बात छोड़िए. जब मनमोहनसिंह की सरकार थी तब भी योजना आयोग ने गरीबी का पैमाना तय करते हुए कहा था कि ग्रामीण क्षेत्र का 26 रुपया रोज कमाने वाला तथा शहरी क्षेत्र का 32 रुपया रोज कमाने वाला व्यक्ति गरीब नहीं है. यह गरीबी रेखा से बाहर आ चुका है.

    अब खट्टर सरकार की दरियादिली देखिए कि वह 1.80 लाख वार्षिक अर्थात 15,000 रुपए प्रतिमाह कमाने वालों को भी गरीब मानेगी. उसके पास खुद का 4 मंजिला पक्का मकान और कार रहने पर भी सरकार की नजरों में वह गरीब ही रहेगा.’’ हमने कहा, ‘‘जब समृद्धि का स्तर ऊंचा होता चला जाता है तो गरीब का स्टैंडर्ड भी बढ़ जाता है. वह सत्यनारायण की कथा वाला भिक्षा मांगनेवाला गरीब नहीं रह जाता. हरियाणा में प्रति व्यक्ति आय अच्छी है. वहां के किसान अच्छा खाते पीते हैं. ट्रैक्टर रैली निकालते हैं, महीनों धरना दे सकते हैं. गर्मी में उनके टेन्ट में एसी लगा रहेगा. इसके बाद भी वे स्टैंडर्ड वाले गरीब हैं.’’