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महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ था, उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था।
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ था, उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था।
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महात्मा गांधी का विवाह मई 1883 को 14 साल की आयु में कस्तूरबा से कर दिया गया था।  उस समय कस्तूरबा गांधी की आयु 13 वर्ष थी।
महात्मा गांधी का विवाह मई 1883 को 14 साल की आयु में कस्तूरबा से कर दिया गया था। उस समय कस्तूरबा गांधी की आयु 13 वर्ष थी।
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महात्मा गांधी बहुत ही सीधे सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। धन के लिए  कभी भी लालच नहीं करते थे। वकालत के पेशे में सिर्फ वही मुकदमे लेते थे जो सच्चे होते थे। बुरे और बेईमान लोगों का मुकदमा नहीं लेते थे।
महात्मा गांधी बहुत ही सीधे सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। धन के लिए कभी भी लालच नहीं करते थे। वकालत के पेशे में सिर्फ वही मुकदमे लेते थे जो सच्चे होते थे। बुरे और बेईमान लोगों का मुकदमा नहीं लेते थे।
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महात्मा गांधी प्रतिदिन 18 किलोमीटर पैदल चलते थे यह उनके जीवनकाल में दुनिया के 2 चक्कर लगाने के बराबर है।
महात्मा गांधी प्रतिदिन 18 किलोमीटर पैदल चलते थे यह उनके जीवनकाल में दुनिया के 2 चक्कर लगाने के बराबर है।
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महात्मा गांधी के जन्म दिवस पर संयुक्त राष्ट्र ने 2 अक्टूबर को “विश्व अहिंसा दिवस” के रूप में मनाने का फैसला किया है।
महात्मा गांधी के जन्म दिवस पर संयुक्त राष्ट्र ने 2 अक्टूबर को “विश्व अहिंसा दिवस” के रूप में मनाने का फैसला किया है।
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महात्मा गांधी नमक सत्याग्रह, दांडी मार्च और सविनय अवज्ञा आंदोलन का हिस्सा रहे।
महात्मा गांधी नमक सत्याग्रह, दांडी मार्च और सविनय अवज्ञा आंदोलन का हिस्सा रहे।
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रवीन्द्र नाथ टैगोर ने सबसे पहले उन्हें महात्मा की उपाधि दी थी और रवीन्द्र नाथ टैगोर को गुरुदेव की उपाधि महात्मा गांधी ने दी थी।
रवीन्द्र नाथ टैगोर ने सबसे पहले उन्हें महात्मा की उपाधि दी थी और रवीन्द्र नाथ टैगोर को गुरुदेव की उपाधि महात्मा गांधी ने दी थी।
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ट्रेन से यात्रा करते समय एक बार महात्मा गांधी का एक जूता नीचे गिर गया। उन्होंने अपना दूसरा जूता भी फेक दिया। जब बगल के यात्री ने कारण पूछा तो वे बोले एक जूता मेरे किसी काम नहीं आएगा। कम से कम मिलने वाले को तो दोनों जूते पहनने का मौका मिले।
ट्रेन से यात्रा करते समय एक बार महात्मा गांधी का एक जूता नीचे गिर गया। उन्होंने अपना दूसरा जूता भी फेक दिया। जब बगल के यात्री ने कारण पूछा तो वे बोले एक जूता मेरे किसी काम नहीं आएगा। कम से कम मिलने वाले को तो दोनों जूते पहनने का मौका मिले।
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नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। महात्मा गांधी की मृत्यु के बाद उनके शव यात्रा में 10 लाख  लोग शामिल हुए। 15 लाख लोग शव यात्रा के रास्ते में खड़े हुए थे। उनकी शव यात्रा भारत के इतिहास में सबसे बड़ी शव यात्रा थी। लोग खंभों, पेड़ और घर की छतों पर चढ़कर बापू को एक नजर देखना चाहते थे।
नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। महात्मा गांधी की मृत्यु के बाद उनके शव यात्रा में 10 लाख लोग शामिल हुए। 15 लाख लोग शव यात्रा के रास्ते में खड़े हुए थे। उनकी शव यात्रा भारत के इतिहास में सबसे बड़ी शव यात्रा थी। लोग खंभों, पेड़ और घर की छतों पर चढ़कर बापू को एक नजर देखना चाहते थे।