तीन अंगों से दिव्यांग को भारत प्रेरणा अवार्ड

  • फिटनेस कोच टिंकेश कौशिक का नाम लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज

पुणे. कौन कहता है दिव्यांगता आपके विकास में बाधा बन सकती है. कम से कम टिंकेश कौशिक को देखकर तो यही लगता है. तीन अंगों से दिव्यांग कौशिक फिटनेस सेवी हैं. फिटनेस के प्रति उनकी लगन व मेहनत का ही नतीजा है कि आज वे सेलिब्रिटी फिटनेस कोच बन गए हैं. उन्हें भारत प्रेरणा अवार्ड भी प्रदान किया जा चुका है.

हरियाणा के झज्जर के रहने वाले कौशिक का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज है. वह एक प्रशिक्षित योग शिक्षक और वेलनेस कोच हैं. शारीरिक अक्षमताओं के साथ-साथ विकलांग लोगों के लिए प्रशिक्षण और सलाह देते हैं और फिटनेस और पोषण के दृष्टिकोण से मार्गदर्शन भी देते हैं. वे पुणे के संचेती अस्पताल में एक स्वयंसेवक के रूप में भी काम करते हैं, जहां अनुकूल तकनीकों के माध्यम से अंग पुनर्वास किया जाता है.

पुणे में चलाते हैं आधुनिक जिम 

टिंकेश ने पुणे में उंड्री-पिसोली रोड पर माइलस्टोन- द फिटनेस क्लब नाम से सुसज्जित जिम शुरू किया हुआ है. यह आधुनिक उपकरणों के साथ एक पूरी तरह कार्यात्मक जिम है और आधुनिक संसाधनों के अलावा वे अपने ग्राहकों के लिए फंक्शनल ट्रेनिंग, योगा और ज़ुम्बा वर्ग चलाते हैं.

जब वे 9 साल के थे तब दुर्घटना में उनके घुटने के नीचे के दोनों पैर और और बांया कंधा कट गया. 11 साल की उम्र में, उन्हें जयपुर फुट (कृत्रिम पैर) लगा, जिससे उन्होंने अपने दम पर चलना शुरू कर दिया. उन्होंने इस कठिन परिस्थिति में अपने परिवार के अटूट सहयोग के सहारे 2015 में अपनी डिग्री पूरी की.

उन्होंने कई मैराथन दौड़ में हिस्सा लिया. आगे चलकर टिंकेश स्वास्थ्य और फिटनेस उद्योग से प्रभावित हुए. वर्ष 2016 में, उन्होंने अपने पूर्ण शरीर में परिवर्तन किया. व्यायाम और खेल के माध्यम से 2 साल की अवधि में 10-15 किलो वजन उन्होंने कम किया. 2018 में वे पुणे आए और अपनी मेन्टर स्मिता गौतम के मार्गदर्शन में,आईएनएफएस, पुणे (इन्स्टिट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन एंड फिटनेस साइंसेस) से फिटनेस और न्यूट्रिशन कन्सल्टंट के रूप में एक प्रमाण पत्र प्राप्त किया.

विकलांगता ने उनकी क्षमता का अहसास कराया

25 नवंबर, 2018 को, नेपाल के काठमांडू में भारत प्रेरणा पुरस्कार से सम्मानित टिंकेश कौशिक ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया, जब उन्होंने द लास्ट रिसॉर्ट में 160 मीटर की उंचाई से बंजी जंप किया, जो दुनिया का सबसे लंबा कैनियन स्विंग साइट था. इस उपलब्धि के लिए, उन्हें लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड के 2020 संस्करण में सम्मानित किया गया है. कौशिक ने कहा कि अपने अंगों को खोने के बाद, वे एक धावक, तैराक, पैरा-साइकलिस्ट, मैराथनर और फिटनेस प्रेमी बन गए. वे मानते हैं कि विकलांगता ने उन्हें उनकी असली क्षमता को देखने की उनकी आंखें खोल दी हैं.