एसटी बस से पंढरपुर पहुंचेंगी पालकियां

पुणे. देहू और आलंदी से संत तुकाराम महाराज और संत ज्ञानेश्वर महाराज की निकलनेवाली पालकी यात्राओं पर महामारी कोरोना ग्रहण कायम है. इस साल लाखों के हुजूम में पैदल यात्रा की बजाय महाराष्ट्र राज्य परिवहन की बस से संत तुकाराम और ज्ञानेश्वर की ‘पादुका’ 30 जून को पंढरपुर पहुंचाई जाएगी. पुणे के जिलाधिकारी नवलकिशोर राम ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि ‘पादुका’ को 20 ‘वारिकारियों’ के साथ बस से पंढरपुर ले जाया जायेगा. 

इस साल पैदल यात्रा रद्द कर दी गई 

ज्ञात हो कि महामारी कोरोना का संक्रमण न फैले इसके लिए इस साल पैदल यात्रा रद्द कर दी गई है. परंपरा के अनुसार दो मराठी संत-कवि तुकाराम और ज्ञानेश्वर की पादुका को श्रद्धालु पुणे जिले में देहू और आलंदी में उनके मंदिरों से पालकी के रूप में पंढरपुर लेकर जाते है. हालांकि इस बार कोरोना वायरस महामारी के कारण पंढरपुर में विठ्ठल मंदिर में तीर्थयात्रा का आयोजन सामान्य रूप से नहीं हो सका. पुणे के जिलाधिकारी नवलकिशोर राम ने बताया कि ‘आषाढ़ी एकादशी’ से एक दिन पहले 30 जून को पंढरपुर में पादुका को महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम की एक बस लेकर जाया जायेगा. सामान्य समय में पूरे महाराष्ट्र से आषाढ़ी एकादशी पर लाखों की संख्या में तीर्थयात्री इस यात्रा में शामिल होते है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पायेगा.

  इन्सीडेंट कमांडर की नियुक्ति 

आषाढी एकादशी के पहले दिन यानी 30 जून को दशमी पर श्री क्षेत्र पंढरपुर जाने के लिए पुणे जिले से श्री संत ज्ञानेश्वर महाराज संस्थान, आलंदी देवाची, श्री संत तुकाराम महाराज संस्थान, श्रीक्षेत्र देहू, श्री संत सोपानदेव महाराज संस्थान, श्रीक्षेत्र सासवड, पुरंदर व श्री संत चांगवटेश्वर देवस्थान, श्रीक्षेत्र सासवड, इन चार संतों की पालकियों को अनुमति दी गई है. साथ ही आपदा प्रबंधन कानून 2005 के अनुसार इन्सीडेंट कमांडर की नियुक्ति की गई है. इसमें पालकियों के उक्त क्रमवार खेड़ के उपविभागीय अधिकारी संजय तेली (मो.नं.9405583799), हवेली के नायब तहसिलदार संजय भोसले (मो.नं.9960171046), दौंड के निवासी नायब तहसिलदार सचिन आखाडे (मो.नं.7875078107), पुरंदरके नायब तहसिलदार उत्तम बढे  (मो.नं.9402226218) का समावेश है.

हजारों सालों की ऐतिहासिक परंपरा 

आषाढ़ के माह में देहू से संत तुकाराम महाराज और आलंदी संत ज्ञानेश्वर महाराज की पालकियां पंढरपुर के लिए निकलती हैं. इसमें राज्यभर से लाखों वारकरी पैदल ही शामिल होते हैं. इस पालकी सम्मेलन को हजारों सालों की ऐतिहासिक परंपरा है, जो महाराष्ट्र के लाखों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा है. इस साल वैश्विक महामारी कोरोना के बढ़ते प्रकोप के चलते इस पालकी सम्मेलन पर शुरू से ही अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे थे. जिला प्रशासन के साथ दोनों देवस्थानों के विश्वस्तों एवं वारकरी प्रतिनिधियों की बैठक में यह तय किया गया कि इस साल पैदल पालकी यात्रा नहीं निकाली जाएगी. इसकी बजाय संत तुकाराम महाराज और संत ज्ञानेश्वर महाराज की पादुकाओं को बस, हेलीकॉप्टर या फ्लाइट से पंढरपुर ले जाने के विकल्पों पर चर्चा की गई. तब बारिश के मौसम की स्थिति को देखते हुए उचित फैसला करने के अधिकार राज्य सरकार को सौंपा गया था.