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    -सीमा कुमारी

    हिंदू धर्म में श्रावण माह का बड़ा महत्व होता है। सावन का महीना देवों के देव महादेव को समर्पित होता है। इस दौरान अगर श्रद्धा पूर्वक महादेव की पूजा-अर्चना की जाए, तो वह शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करते हैं। सावन के इस पावन महीने में ही माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या की थी। इस  साल सावन 25 जुलाई से शुरू हो रहे हैं। सावन के पूरे माह में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा का विधान है। शास्त्रों के अनुसार, सावन महीने को लेकर कई नियम बताए गए हैं, जिन्हें मानना आवश्यक माना जाता है। ये नियम मनुष्य के आचरण के साथ-साथ खान-पान को लेकर बताए गए हैं।  आइए जानें सावन महीने  में क्या-क्या करने की मनाही होती  है।

    • मान्यता अनुसार, सावन के महीने में परिवार के भीतर किसी भी प्रकार का झगड़ा, लड़ाई और क्लेश नहीं करना चाहिए। ये महीना भगवान शिव और माता गौरी को समर्पित होता है। ऐसे में हमें परिवार के बीच प्रेम बनाकर रखना चाहिए।
    • सावन के महीने में लहसुन और प्‍याज  का सेवन करने की भी मनाही होती है। इसका सेवन करने से जुनून, उत्तजेना और अज्ञानता को बढ़ावा देती हैं जिस कारण अध्यात्मक के मार्ग पर चलने में बाधा उत्पन्न होती हैं और व्यक्ति की चेतना प्रभावित होती है।इसलिए ऐसा करने से परहेज करें।
    • कहा तो ये भी जाता है कि, सावन के महीने में किसी भी दुर्बल व्यक्ति या जीव-जंतु को सताना नहीं चाहिए। इससे भगवान शिव गुस्सा हो जाते हैं।
    • सावन के महीने में मांस-मदिरा का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। इससे व्यक्ति का मन अशांत हो जाता है। इसलिए इस महीने सात्विक जीवन जीना चाहिए।
    • इस महीने बैगन, मूली और मसूर की दाल का सेवन भी वर्जित बताया गया है। इसके अलावा बासी और जला हुआ भोजन को भी अपवित्र और तामसिक भोजन की श्रेणी में रखा गया है। इसलिए ऐसा करने से बचें।