तीन पैरों वाली गायत्री माता का चमत्कारी मंदिर, पढ़े कथा

गायत्री मां का जिक्र हमारे चारों वेदों में किया गया है। वेदों में गायत्री मां को मां पार्वती, सरस्वती, लक्ष्मी का अवतार कहा गया है। साथ में ही इनको ब्रह्मा जी की दूसरी पत्नी भी कहा जाता है। वेदों में

गायत्री मां का जिक्र हमारे चारों वेदों में किया गया है। वेदों में गायत्री मां को मां पार्वती, सरस्वती, लक्ष्मी का अवतार कहा गया है। साथ में ही इनको ब्रह्मा जी की दूसरी पत्नी भी कहा जाता है। वेदों में इनको ज्ञान-गंगा का भी नाम दिया गया है। पर क्या आप ने तीन पैरों वाली माता के बारे में सुना है? जी हां तीन पैरों वाली गायत्री माता की मूर्ति  देवास जिले की तहसील हाटपीपल्या के नृसिंह मंदिर स्थापित है।
 
मध्यप्रदेश के देवास जिले से करीब 45 किमी दूर हाटपीपल्या गाँव के नृसिंह मंदिर में गायत्री माता की एक विचित्र मूर्ति स्थापित है, जिसके तीन पैर हैं। यहाँ पर नृसिंह भगवान की भी चमत्कारिक प्रतिमा है, जो प्रति वर्ष नदी में तैरती है या कि जिसे प्रति वर्ष डोल ग्यारस के दिन तैराया जाता है। मंदिर के पुजारी गोपाल वैष्णव ने बताया कि मैंने आज तक तीन पैरों वाली प्रतिमा कहीं नहीं देखी। इस तरह की प्रतिमा देखने को नहीं मिलती।
 
मंदिर के पुजारी का कहना है कि मंदिर में स्थापित नृसिंह भगवान की प्रतिमा नृसिंह पहाड़ से लाई गई है। पहले यह प्रतिमा नृसिंह गढ़ी में खेड़ापति मंदिर में स्थापित थी, लेकिन पिछले लगभग 85 वर्षों से इस प्रतिमा के लिए अलग नृसिंह मंदिर का निर्माण कर विधिवत स्थापित किया गया है।
 
गायत्री माता की प्रतिमा को स्थापित हुए भी 85 वर्ष हो चुके हैं। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि यह विश्व की एकमात्र प्रतिमा है जो तीन पैरों वाली है। यहाँ स्थित प्रतिमा को ‘त्रिपदा गायत्री’ माता कहते हैं। इस प्रतिमा के बारे में भी मान्यता हैं कि इसका दर्शन करने से सभी तरह की मनोकामना पूरी होती है।
 
ब्रह्मा जी से विवाह कथा है प्रचलित
शास्त्रों के अनुसार एक बार भगवान ब्रह्मा एक यज्ञ में शामिल हुए थे। इस यज्ञ में पत्नी का साथ में बैठना अनिवार्य था। लेकिन भगवान ब्रह्मा की पत्नी सावित्री उनके साथ किन्हीं कारण के चलते इस यज्ञ में नहीं आ पाई थी। यज्ञ में शामिल होने के लिए ब्रह्मा जी ने देवी गायत्री से विवाह कर लिया और उनके साथ इस यज्ञ में शामिल हुए।