येदि की यात्रा से BJP को छूटा पसीना

    यद्यपि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने बढ़ती उम्र का हवाला देकर येदियुरप्पा को इस्तीफा देने के लिए विवश कर उनकी जगह बसवराज बोम्मई को कर्नाटक का मुख्यमंत्री बना दिया लेकिन फिर भी लिंगायत समुदाय के कद्दावर नेता येदि की प्रस्तावित कर्नाटक यात्रा से बीजेपी को पसीना छूट गया है. पार्टी नेताओं को डर है कि येदियुरप्पा अपनी इस यात्रा के दौरान कहीं भड़ास निकालने वाली बयानबाजी की वजह से बीजेपी की फजीहत न करा दें. वे अपनी यात्रा का इस्तेमाल अपने बेटे विजयेंद्र के लिए रास्ता बनाने और नए मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के लिए मुश्किलें बढ़ाने के लिए भी कर सकते हैं.

    यद्यपि येदियुरप्पा ने इस यात्रा में अपने साथ प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष नलिनकुमार कतील को ले जाने के पार्टी के सुझाव को स्वीकार कर लिया है लेकिन फिर भी बीजेपी नेता यात्रा के उद्देश्यों को लेकर आशंकित और पसोपेश में हैं. येदियुरप्पा कोई मामूली नेता नहीं हैं, वे 4 बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. कर्नाटक की राजनीति में लिंगायत समुदाय का काफी दबदबा है. बीजेपी नेतृत्व ने भी वहां के जाति समीकरण का ध्यान रखा और येदियुरप्पा को हटाकर उन्हीं के लिंगायत समुदाय के बसवराज बोम्मई को मुख्यमंत्री बनाया. बीजेपी उस बड़े समुदाय या जाति की उपेक्षा नहीं कर सकती जिसका उसे व्यापक समर्थन मिला हुआ है. येदियुरप्पा की यात्रा को लेकर पार्टी को आशंका है कि वे कहीं राजनीतिक उथल-पुथल वाला माहौल न बना दें.

    येदि ने शर्त रखी थी कि यदि वे मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं तो नई सरकार में उनके बेटे विजयेंद्र को मंत्री बनाया जाए. उनकी कोई भी शर्त नहीं मानी गई. इस यात्रा में वे अपने को अन्यायग्रस्त बताकर अपने बेटे के पक्ष में जनमत तैयार करवा सकते हैं. लिंगायत समाज के वरिष्ठ नेता होने से उनकी पैठ आज भी कम नहीं है. येदि की समर्थक कर्नाटक की खनन लॉबी भी रही है और संसाधनों की दृष्टि से वे आज भी काफी मजबूत हैं.