Sensex

    नयी दिल्ली: बंबई शेयर बाजार के प्रमुख शेयर सूचकांक बीएसई सेंसेक्स ने 25 जुलाई 1990 को पहली बार 1,000 अंक का स्तर छुआ था और शुक्रवार को इसने पहली बार 60,000 के रिकॉर्ड स्तर को छुआ, जो एक ऐतिहासिक और यादगार यात्रा है। सेंसेक्स को 1,000 से 60,000 के स्तर तक पहुंचने में 31 साल से थोड़ा अधिक समय लगा।

    दिलचस्प बात यह है कि सेंसेक्स ने 2021 में ही नौ माह की अवधि में 50,000 अंक और 60,000 अंक, दोनों स्तर को पार किया, जो कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बीच बाजार के लचीलेपन को दर्शाता है। अपनी 60 हजार अंक तक पहुंचने की इस यात्रा में बाजार 1992 में हर्षद मेहता घोटाला का गवाह बना।

    उसने 1993 में मुंबई और बीएसई की इमारत में विस्फोट, कारगिल युद्ध (1999), अमेरिका में आतंकी हमला और भारतीय संसद पर आतंकी हमला (2001), सत्यम घोटाला, वैश्विक वित्तीय संकट, नोटबंदी, पीएनबी घोटाला और कोविड महामारी जैसे संकट को देखा। पिछले कुछ वर्षों में 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक ने कई रिकॉर्ड बनाए। सूचकांक पहली बार छह फरवरी 2006 को 10,000 अंक पर पहुंचा था।

    इसके बाद 29 अक्टूबर 2007 को इसने 20,000 के स्तर को पार किया लेकिन इसके बाद 30,000 अंक तक पहुंचने में सेंसेक्स ने सात साल से अधिक समय लेते हुये चार मार्च 2015 को यह मुकाम हासिल किया। इसके बाद चार साल में 23 मई 2019 को 40,000 अंक और अगले दस हजार अंक की वृद्धि दो साल से भी कम समय में हासिल करते हुये यह 21 जनवरी 2021 को 50,000 अंक के पार निकल गया।

    दिलचस्प बात यह है कि सेंसेक्स ने 2021 में ही 50,000 अंक और 60,000 अंक, दोनों स्तर को पार किया, जो कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बीच बाजार के लचीलेपन को दर्शाता है। बीएसई के सीईओ आशीष कुमार चौहान ने शुक्रवार को किए एक ट्वीट में उक्त घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बाजार ने पिछले कुछ वर्षों में कई अनिश्चितताओं का सामना किया है।

    बीएसई सूचकांक इस साल अब तक 25 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है, जबकि पिछले महीने इसमें नौ प्रतिशत से अधिक की तेजी आई। हालांकि, इस तेजी से पहले मार्च 2020 में सेंसेक्स में करीब 15.7 प्रतिशत की भारी गिरावट भी हुई। इक्विटीमास्टर के शोध विश्लेषक बृजेश भाटिया ने कहा कि बाजार में धारणा मजबूत है और यहां से थोड़ी गिरावट निवेश के लिए एक अच्छा अवसर होगा।