ममता ने पकड़ी अपनी राह नेतृत्व की जबरदस्त चाह UPA की नहीं परवाह

    पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी राजनीति में नई जमीन तलाश रही हैं. वैसे भी उनकी पार्टी जमीन से जुड़ी है क्योंकि घास के तिनके को तृणमूल कहते हैं और घास जमीन में ही उगती है. ममता का तालमेल एनसीपी प्रमुख शरद पवार से जमता नजर आ रहा है.’’ 

    हमने कहा, ‘‘ममता की सोनिया-राहुल की कांग्रेस से कोई ममता, प्रेम या स्नेह नहीं रह गया. दिल्ली गईं तो सोनिया से मिलना जरूरी नहीं समझा. उन्हें पुराने यूपीए की कोई परवाह नहीं है. उनके मन में राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व करने की चाह है. उनकी एम्बिशन है कि नेशन को लीड करें.’’ 

    पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, एक समय ऐसा भी था जब बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री और सीपीएम नेता ज्योति बसु को संयुक्त मोर्चा प्रधानमंत्री बनाना चाहता था लेकिन उन्होंने इसके लिए मना कर दिया था. अब ममता बंगाल के सीएम पद से छलांग लगाकर सीधे पीएम बनने का अरमान रखती हैं. इसके लिए वे हौसला जुटा रही हैं और चिड़िया के समान तिनका-तिनका बटोर कर घोंसला बनाने में लगी हैं. मोदी विरोधियों से उनकी यारी है और 2024 के लिए अभी से तैयारी है.’’

    हमने कहा, ‘‘ममता सधे हुए तरीके से ‘खेला होबे’ कहकर अपना गेम खेल रही हैं. ममता ने दो टूक शब्दों में कांग्रेस के ढीलेपन पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए कुछ नहीं कर रही है, ऐसे में बाकी दल चुप नहीं बैठ सकते. यूपीए का अस्तित्व नकारते हुए उन्होंने कहा कोई यूपीए नहीं है. इसका मतलब है कि क्षेत्रीय पार्टियों को कांग्रेस को कोई तवज्जो नहीं देनी चाहिए. राहुल का नाम लिए बगैर ममता ने कहा कि कोई कुछ करेगा नहीं और सिर्फ विदेश में रहेगा तो कैसे काम चलेगा!’’ 

    पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, ममता को कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस बिना यूपीए का मतलब आत्माविहीन शरीर होगा. इसी तरह शरद पवार ने भी कुछ माह पहले कहा था कि कांग्रेस को साथ लिए बगैर बनाया जानेवाला विपक्षी गठबंधन कमजोर रहेगा.’’