कोलकाता, मुंबई, चेन्नई में क्यों नहीं PM का आजादी अमृत महोत्सव UP में ही क्यों?

    प्रधानमंत्री मोदी पूरे देश के सीईओ हैं. हर कोई अपेक्षा करता है कि पीएम को अपने विजन में समूचे राष्ट्र को रखना चाहिए तथा अपनी जनकल्याण योजनाओं को वहां भी लागू करना चाहिए जहां बीजेपी या एनडीए सत्ता में नहीं है. खास तौर पर आजादी के अमृत महोत्सव का संबंध भारत के कोने-कोने से है, इसलिए इससे संबंधित नीतियों व कार्यक्रमों को व्यापक और सर्वसमावेशक होना चाहिए. इसमें कहीं भी पक्षपात नजर न आए.

    पीएम ने लखनऊ में अर्बन इंडिया कॉनक्लेव का उद्घाटन किया और उत्तर प्रदेश के 75 जिलों के 75,000 लाभार्थियों को प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के तहत निर्मित घरों की चाबियां डिजिटली सौंपी. प्रश्न उठता है कि पीएम का आजादी अमृत महोत्सव केवल यूपी में ही क्यों हो रहा है? कोलकाता, मुंबई, चेन्नई, शहरों के लोगों को भी तो आवास चाहिए! उन्हें शहरी आवास योजना में क्यों भुला दिया गया? इससे तो यही संकेत मिलता है कि यूपी में कुछ माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रधानमंत्री का ध्यान वहीं है.

    सीएम खुद वाराणसी से सांसद हैं तथा यूपी में बीजेपी की सरकार है, इसलिए आजादी अमृत महोत्सव योजनाओं को वहीं केंद्रित किया जा रहा है और देश के अन्य राज्यों व शहरों की उपेक्षा हो रही है. इसी तरह मोदी ने ‘पीएम केयर्स’ के तहत स्थापित ऑक्सीजन प्लांट उत्तराखंड राज्य के ऋषिकेश में उद्घाटित किया. उत्तराखंड में भी विधानसभा चुनाव होने जा रहा है. बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस मुद्दे पर बीजेपी को आड़े हाथ लिया. उन्होंने कहा कि बीजेपी द्वारा यूपी में गरीबों के लिए आवास आवंटन आदि का कार्य चुनावी स्वार्थ की पूर्ति के लिए जल्दबाजी में आधा-अधूरा नहीं होना चाहिए, बल्कि योजनाओं के पूरी होने पर ही इनका सही उद्घाटन व आवंटन हो तो बेहतर रहेगा. चुनाव निकट आने पर ज्यादातर योजनाओं के शिलान्यास व आधी-अधूरी स्कीमों का उद्घाटन आदि करने की जो गलत प्रवृत्ति रही है, उससे इनके पूरा न होने पर जनहित बुरी तरह से प्रभावित होता है.