चामिंडा वास: विश्व क्रिकेट का वो सितारा जिसे बनना था पादरी, पर बन गया दुनिया का सफल गेंदबाज

    नई दिल्ली: आज के समय में बहुत से बच्चों का सपना होता है कि वह बड़े होकर एक मशहूर क्रिकेटर बने। दुनिया भी उन्हें सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी, सौरव गांगुली की तरह पहचानें। बहुत से बच्चे ऐसे ही सपने के साथ बड़े होते हैं और अपने सपने को पूरा भी करते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे क्रिकेटर (Cricketer) के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका सपना क्रिकेटर बनना नहीं बल्कि एक पादरी बनना था। यह क्रिकेटर श्रीलंका (Sri Lanka) के महानतम गेंदबाजों में से एक चमिंडा वास (Chaminda Vaas Birthday) है। जिनका आज यानी 27 जनवरी को जन्मदिन है। 

    गेंद से किए कई करिश्मे 

    आज ही के दिन 27 जनवरी 1974 के कोलंबो (Colombo) के पास वट्टाला (Wattala) में जन्मे चमिंडा वास ने करीब 15 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर में कई उपलब्धियां हासिल की है। वह अपने देश के सबसे सफल गेंदबाजों में से एक हैं, जिन्होंने 1990 और 2000 के पहले दशक में दिग्गज बल्लेबाजों को खूब परेशान किया। चामिंडा ने किफायती गेंदबाजी से लेकर विकेटों के रिकॉर्ड बनाने तक कई करिश्मे किए हैं। 

    क्रिकेटर के बजाए बनना चाहते थे पादरी  

    चमिंडा वास का जन्म एक कैथोलिक परिवार में हुआ था। उनका परिवार काफी धार्मिक था, इसी वजह से इसका असर उन पर काफी पड़ा। उन्होंने क्रिकेट में अपना करियर बनाने के बारे में कभी सोचा ही नहीं था। उनका बचपन का सपना इन खेल-कूद की दुनिया से पूरी तरह अलग था। चमिंडा वास बचपन से ही चर्च के पादरी बनना चाहते थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह पादरी बनने को लेकर काफी गंभीर थे, लेकिन इसके लिए उन्हें 12 से 14 साल तक की कड़ी पढ़ाई करनी पड़ती। लेकिन, फिर उसके बीच उन पर क्रिकेट का जादू छा गया। जिसके बाद वह श्रीलंका के बेहतरीन गेंदबाज बन गए।  

    ऐसे रिकॉर्ड जिसे तोड़ना है नामुमकिन  

    चमिंडा वास श्रीलंका क्रिकेट टीम के सबसे प्रमुख गेंदबाज बन गए। वास और मुथैया मुरलीधरन ने श्रीलंकाई गेंदबाजी को मजबूती दी। फिर वास ने अपने कई रिकॉर्डों की शुरुआत की। इसमें सबसे बड़ा चमत्कार हुआ 2001 में जिम्बाब्वे के खिलाफ। 8 दिसंबर 2001 को कोलंबो में वास ने इतिहास रचते हुए ऐसा रिकॉर्ड अपने नाम किया, जिसे तोडना बेहद मुश्किल हो गया है। इस मैच में पहले गेंदबाजी करते हुए श्रीलंका ने जिम्बाब्वे को सिर्फ 38 रनों पर ढेर कर दिया। ये उस वक्त का सबसे छोटा स्कोर था और इसके जिम्मेदार थे चमिंडा वास। इस मैच में उन्होंने 8 ओवरों में 3 मेडन कराते हुए 8 विकेट हासिल किए थे। जो वनडे क्रिकेट के इतिहास में सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी का रिकॉर्ड है, जो आज भी कोई तोड़ नहीं पाया है। 

    वास यहीं नहीं रुके। वह उन गेंदबाजों में शामिल है, जिसने अपने करियर में 2 बार हैट्रिक ली है। उन्होंने अपनी पहली हैट-ट्रिक ज़िम्बाब्वे के खिलाफ थी। जबकि  दूसरी हैट्रिक साल 2003 में हुए वर्ल्ड कप के दौरान बांग्लादेश के खिलाफ थी। उन्होंने एक ओवर की पांचवीं गेंद पर चौथा विकेट हासिल कर यह कारनामा किया था। इस मैच में उन्होंने 9.1 ओवरों में 25 रन देकर 6 विकेट अपने नाम किए थे। 

    क्रिकेट जगत में है सबसे लंबा नाम 

    इन सबके अलावा आपको ये जानकर हैरानी होगी कि चमिंडा वास का क्रिकेट इतिहास में सबसे लंबा नाम है। उनका पूरा नाम “वर्नाकुला सूर्या पताबेंडिगे उसंथा जोसफ चामिंडा वास” हैं। जो किसी भी क्रिकेटर से सबसे लंबा नाम है।