20 घंटे पश्चात जखमी अवस्था में मिला पति, दम्पत्ती पर बाघ के हमले का मामला

    चिमूर/शंकरपुर. तेंदुपत्ता संकलन के लिए जंगल गए केवाड निवासी जांभुलकर दम्पत्ती पर मंगलवार की सुबह बाघ ने हमला किया था. हमले में मिना जांभुलकर की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई थी. परंतु पती विकास जांभुलकर घटनास्थल से गायब रहने से वनविभाग में खलबली मच गई. मंगलवार की शाम तक परिसर के जंगल में वनविभाग व पुलिस ने विभाग तलाशी अभीयान चलाया. परंतु देर शाम तक विकास का पता नही चलने से दोनो विभाग लौट आए. आखिरकार दूसरे दिन बुधवार की सुबह 9 बजे 20 घंटे बाद दत्तमंदिर के पास विकास जखमी अवस्था में मिला. उसे चिमूर के उपजिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती किया गया. 

    चिमूर तहसील के केवाडा के विकास जांभूलकर यह पत्नी मिना के साथ तेंदुपत्ता तोडने के लिए गांव से 1 किमी दूरी पर कक्ष क्रमांक 34 में मंगलवार की सुबह गए थे. उनके साथ गांव के कुछ लोग ओर थे. जंगल में जाने के पश्चात सभी लोग तेंदुपत्ता तोडने अलग_अलग बिखर गए. जांभलकर दम्पत्ती एकसाथ रहकर पत्ते तोड रहे थे. पती विकास की नजर कमजोर रहने से पत्नी मीना इस कार्य में उसका हाथ बटाती थी. 

    दौरान जंगल में शिकार के ताक में बैठे बाघ ने दम्पत्ती पर हमला किया. जिसमें मीना की घटनास्थल पर मूत्यु हो गई. तो पती विकास घटनास्थल से गायब था. काफी देने पर होने पर भी दम्पत्ती घर नही लौटने पर बच्चों ने यह बात गांववासियों को बतायी. गावंवासियों ने केवाडा कक्ष क्रमांक 34 जंगल परिसर में जाकर तलाशी शुरू की. इसकी सूचना वनविभाग व पुलिस विभाग को दी गई. तलाशी में पत्नी मीना जांभूलकर का शव पाया गया. तो घटनास्थल से 50 मीटर की दूरी पर पती विकास का चष्मा रक्त से लथपथ मिला. 

    विकास लापता होने से वनविभाग व पुलिस विभाग ने मंगलवार को तलाशी अभीयान चलाया. मंगलवार की शाम तक विकास का पता नही चलने से तलाशी अभीयान को रोक दिया गया. व मीना के शव को चिमुर के उपजिला अस्पताल में रखा गया.  

    बुधवार केा पुन: वनविभाग के क्षेत्र सहाय्यक रासेकर, वनरक्षक नागरे, पीआरटी टिम व स्थानीय नागरीकों ने लाठीयां लेकर केवाडा जंगल कक्ष क्रमांक 34 में सुबह से मुहीम चलायी गई. दौरान घटनास्थल से करिबन डेढ किमी दूरी पर पहाडी परिसर में मंदिर के पास पीआरटी टिम के विनोद चौधरी व सतीश बावने को विकास बेहोशी में दिखाई दिया. उसके सिर को गंभीर चोट थी. तत्काल इसकी जानकारी वनअधिकारीयों को दी गई.

    विकास को बेहोशी के हालत में उठाया गया. इस समय वह पाणी पाणी कह रहा था. 20 घंटे तक विकास प्यासा बेहोशी की अवस्था में रहा. घटनास्थल पर भीड जुट गयी. विकास को पाणी पीलाया गया. इस समय वह बोलने की अवस्था नही था. वह घबराया था. नागरीकों ने व वनविभाग ने उसे गांव लाया. बाघ ने विकास के सिर पर पंजे से वार करने से उसका शरीर लहुलुहान हुवा था. पती विकास लापता रहने से मृतक मिना का अंतिम संस्कार रोका था. पती के उपचार के पश्चात मीना पर अंतिम संस्कार करने की जानकारी दी गई है.