प्रतिक्षालय के अभाव में यात्रियों को हो रही परेशानी

    तिरोडा. यात्री प्रतीक्षालय नहीं होने से  ग्रामीण यात्री पेड़ की छांव, दुकानों या सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करते हैं.  सबसे अधिक परेशानी गर्मी व बारिश में होती है.  इन स्थानों पर यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण कराने की मांग की जा रही है. जबकि इस ओर अनदेखी की जा रही है. 

    जिससे समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है. तिरोडा से गोंदिया की ओर जाने वाली एसटी बसों का स्टापेज शहर के डा. धुर्वे हॉस्पीटल व चंद्रभागा नाके के पास को. ऑप बैंक के सामने दिया गया है. उसी तरह खैरलांजी,  बालाघाट जाने वाले रास्ते पर मारबत बोडी के पास व चांदपुर, सिहोरा जाने वाले रास्ते पर स्नेहल टॉकीज के सामने तथा पिपरिया, परसवाडा होकर खैरलांजी जाने वाली चांदपुर, सिहोरा आने जाने वाली बसों का स्टापेज शहिद मिश्रा विद्यालय के सामने दिया गया है.

    इन स्थानों पर प्रतीक्षालय नहीं है.  इन मार्गों से चलने वाली बसें निश्चित किए गए स्टापेज पर रुकती है. शहर के मध्य भाग से मुख्य बस स्थानक की दूरी लगभग डेढ किमी. होने से सरकारी कामकाज या व्यापार व्यवसाय के कामों से आने वाले देहातों के नागरिक बस स्थानक पर जाने की बजाए इन्हीं स्थानों पर रुक जाते है.  बस स्थानक पर जाना है तब पैदल ही जाना पडता है. इस बीच अगर बस आते दिखी और उसे हाथ दिखाया जाए तो वह रास्ते में नहीं रुकती.

    जबकि रापनि के आदेश  है कि हाथ दिखाओं बस रोको, इसका पालन नहीं होता. यह आदेश केवल कागजों पर ही रह गया है. बस स्थानक पर यात्री को जाना है तब ऑटो, रिक्शे का ही सहारा लेना पडता है. जितने पैसे  बस से गांव जाने में लगते है उससे अधिक बस स्थानक पर ऑटो से पहुंचने में लगते है. इसलिए लोग अधिकृत स्थानों पर रुककर बस का इंतजार करते है. उपरोक्त स्थानों पर पक्के यात्री शेड निवास नहीं होने से आजुबाजू की दुकानों की शरण लेते हुए लोग बस का इंतजार करते है.

    ऐसे में अनेक बार उनसे प्रतिष्ठान मालिकों की बाचाबाची भी हो जाती है. वहीं  यात्रियों को गर्मी व बरसात में सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पडती है. अभी के हालात में इन सभी रास्तों पर सीमेंटीकरण किया गया जिससे पक्की चौडी सडकें बनाई गई. हायवे रास्तों पर अल्युमिनीयम के तैयार शेड जिसमें खुर्चियां भी लगाई गई है. इस प्रकार सांसद/विधायक फंड से  यात्री प्रतिक्षालय भी बनाय जाए. ऐसी मांग नागरिकों द्वारा की जा रही है.