Digital Satbara 712

    गोंदिया. सही जमीन मालिक की जमीन का सातबारा किसी फर्जी किसान के नाम पर ऑनलाइन कर ऐसे फर्जी किसानों से मिलीभगत कर अपना धान बड़े पैमाने पर सोसायटी में बिक्री करने का खेल व्यापारी व दलाल कर रहे हैं. इस फर्जी व्यवस्था से सही किसान अपना खेती माल शासकीय आधारभूत धान खरीदी केंद्र पर बिक्री करने से वंचित रहेगा. जिससे  बडी संख्या में  इमानदार किसानों पर आर्थिक संकट टूट पड़ेगा. वहीं दूसरी ओर तहसील में पुन: धान खरीदी बिक्री के घोटाले होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं.

    विशेष बात यह है कि जिन नई सोसायटियों को धान खरीदी केंद्र मिले हैं वहां  इस प्रकार की गडबडियां  बड़े पैमाने पर हो रही हैं. पहले  ही धान खरीदी घोटाले के लिए बदनाम सालेकसा तहसील में गत वर्ष कुछ नए धान खरीदी केंद्रों को शासन ने मंजूरी दी. जिससे ऐसा लग रहा था कि धान खरीदी केंद्रों पर घोटाले कम होंगे व सही मालक अपना खेत माल सहज रूप से बिक्री कर सकेगा.

    लेकिन व्यापारियों की धान खरीदी केंद्रों के साथ मिलीभगत होने से फर्जी काम करने के लिए नया मार्ग खोज कर निकाला गया है. जिसमें पात्र किसान अन्याय के शिकार हो रहे हैं. इस तरह के अनुचित कार्य के लिए ऐसे लोगों को राजनैतिक संरक्षण  भी प्राप्त होने की संकेत मिले हैं.  सालेकसा तहसील अंतर्गत कुणबीटोला में पिछले वर्ष एक नया धान खरीदी केंद्र मिला है. जहां हमेशा व्यापारियों का बोलबाला होने से अपना धान बिक्री हो इसके लिए कोई भी फंडा खेला जाता है.

    इसी में एक व्यापारी ने घर की भैस चराने के लिए रखे नौकर के नाम पर 8 एकड़ जमीन का सातबारा ऑनलाइन कर डाला है. जबकि वास्तव में उस नौकर के मालकी की जैसे तैसे डेढ़ एकड़ जगह है. बाकी खेत की जमीन उसके मोहल्ले में रहने वाले अन्य किसानों की है. खून के रिश्ते होने से उनके नाम मोहल्ले के अन्य किसानों की खेत जमीन पर सातबारा है  लेकिन उस जमीन पर अधिकार नहीं होने के बाद भी उसके नाम पर सातबारा ऑनलाइन किया गया है.

    इसमें बोनस की आधी रकम देने का लालच देकर उस व्यापारी ने जिस-जिस स्थानों पर उनके नाम सातबारा पर है वहां  जमीन के सातबारा गट व खाता क्रमांक जमा कर सोसायटी के कार्यालय में सातबारा ऑनलाइन करा लिया है. इसके बाद उस जमीन के मालिक किसान अपने गट का सातबारा ऑनलाइन करने गए तब उन्हें उनका सातबारा पहले ही दूसरे के नाम ऑनलाइन होने की जानकारी मिली. जिससे उनका सातबारा  ऑनलाइन नहीं हो सकता. ऐसा कहकर उन किसानों को वापस लौटा दिया गया.

    कुणबीटोला (गोवारीटोला) स्थित एक किसान के पास केवल आधा एकड़ जमीन की मालकी है. जबकि अन्य किसानों की खेती के सातबारा पर शामिल खाते में नाम है. उन्होंने सभी के सातबारा ईकठ्ठा कर व्यापारियों को दे डाला. इस तरह की अनेक घटनाएं तहसील में घटी है. इसमें व्यापारियों की चालाकियों  से सही जमीन मालिकों का   नुकसान हो रहा है. एक फर्जी किसान ने तो उनके पिता का नाम होने पर भी उसकी मालकी की जगह नहीं है फिर भी स्वयं का आधार कार्ड के साथ   सातबारा ऑनलाइन कर डाला है. इसमें एक व्यापारी ने उसकी मदद की है.

    बोनस की आधी रकम देने का करार

    व्यापारी स्वयं पटवारी या कोतवाल के साथ मिलीभगत कर सातबारा निकाल लेता है. उनके नाम पर धान बिक्री करता है. इसके बाद धान के चुकारे आने पर साथ ले जाकर संपूर्ण रकम खाते से निकाल लेता है. बोनस की रकम आने पर उसमें से आधी रकम उस फर्जी किसान को देता है. बिना परिश्रम के  केवल सातबारा देने के बदले में बड़ी रकम उसे प्राप्त होती है. जिससे जितना संभव हो उतने सातबारा जमा करने के प्रयास किए जाते हैं. इन सब प्रक्रियाओं में किसान अपना माल सोसायटी में बिक्री न करते हुए व्यापारी के पास जाता है. वहीं व्यापारी कम भाव में धान खरीदी कर फर्जी किसान के नाम पर धान की बिक्री कर डबल रकम लूटने का प्रयास करते हैं. इस तरह का गोरखधंदा  बढ़ रहा हैं.

    ऑनलाइन केंद्रों पर व्यापारियों का बोलबाला

    इसमें अनेक धान व्यापारी हर दिन 100-150 सातबारा या खेती के गट व खसरा क्रमांक लेकर खरीदी केंद्रों पर ऑनलाइन सातबारा पंजीयन करते है. घंटों बैठकर अपने निकट वाले व्यक्तियों के सातबारा ऑनलाइन करा लेते है. जब कोई किसान स्वतंत्र रूप से पहुंचा तो उसे दिन भर प्रतीक्षा करनी पड़ती है. व्यापारी कुछ पैसे का लालच देकर अपना काम करा लेते है. जबकि गरीब किसानों को व्यापारियों के पीछे लाचार बनकर  घूमना पड़ता है. सभी ऑनलाइन केंद्रों पर आजकल व्यापारियों का बोलबाला है.