…और कितना इंतजार, कुछ तो तय करे सरकार; स्कूल-कॉलेज खोलने पर पालकों का सवाल

    नागपुर. एक ओर जहां सरकार कोरोना की तीसरी लहर की संभावना व्यक्त कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिले में स्थिति में सुधार आ रहा है. पहले सरकार ने गणपति उत्सव को देखते हुए सख्ती लागू की थी. इस बीच जिले में हर दिन मरीजों की संख्या भी सीमित है. वहीं सब कुछ खुल गया है लेकिन स्कूल-कॉलेजों को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं किये जाने से पालकों की चिंता बढ़ती जा रही है. नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुये तीन महीने से अधिक समय बीत गया. कोरोना की वजह से पिछले 18 महीने से स्कूल-कॉलेज बंद है.

    प्रशासन द्वारा पहले अगस्त में तीसरी लहर की संभावना व्यक्त की गई थी जबकि अगस्त में स्थिति सामान्य बनी रही, फिर सितंबर में तीसरी लहर आने की बात कही जा रही थी. अब सितंबर भी समाप्ति की ओर है. इन दिनों जिले में हर दिन 4,000-5,000 लोगों की जांच की जा रही है. जबकि पॉजिटिव लोगों के आंकड़े 10 तक ही सीमित है. किसी दिन 15 तक संक्रमित आते हैं लेकिन पिछले महीनेभर से कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा शून्य हो गया है. इसके बावजूद सरकार द्वारा स्कूल-कॉलेजों के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा है. 

    जिले के ग्रामीण में इक्का-दुक्का संक्रमित 

    पालकों का कहना है कि जिले में स्थिति सामान्य होने लगी है. सिटी को छोड़ दिया जाये तो ग्रामीण भागों में इक्का-दुक्का ही मरीज मिल रहे है जो मरीज मिल रहे हैं, उनकी स्थिति भी सामान्य है. इस हालत में स्कूल-कॉलेज खोलने के बारे में निर्णय लिया जाना चाहिए. सरकार राज्य के अन्य जिलों को ध्यान में रखकर निर्णय ले रही है जो कि अनुचित है. 18 वर्ष से अधिक उम्र वालों को पहला टीका लग गया है. वहीं कई युवाओं ने दूसरा टीका भी पूरा कर लिया है.

    इस हालत में सरकार को रोटेशन पद्धति से कॉलेज खोलने के बारे में फैसला करना चाहिए. पिछला सत्र भी ऑनलाइन पढ़ाई में निकल गया. छात्र परीक्षा में तो उत्तीर्ण हुये लेकिन जॉब के लिए अब भी भटक रहे हैं. यदि इस बार भी यही स्थिति तो फिर डिग्री हासिल करने का भी कोई औचित्य नहीं रह जाएगा. सरकार ने एक-एक कर सब कुछ खोल दिया है तो कॉलेजों को लेकर ही पाबंदी की जिद क्यों की जा रही है.

    बोर्ड के छात्रों की बढ़ रहीं मुसीबतें 

    बोर्ड की तैयारी देने वाले छात्र विविध प्रवेश परीक्षाओं की भी तैयारी करते हैं. कई छात्रों ने कोचिंग-टयूशन भी लगाई है. महंगी फीस भरने के बाद भी ऑनलाइन क्लासेस ली जा रही है. पिछले दिनों सिटी में कुछ जगह ट्यूशन क्लासेस शुरू की गई लेकिन मनपा ने कार्रवाई करते हुए उन्हें बंद करा दिया. पालकों का कहना है कि आखिर सरकार छात्रों के धैर्य की और कितनी परीक्षा लेगी. मौजूदा स्थिति की समीक्षा करने के बाद जिला स्तर पर निर्णय लिया जाना चाहिए. कम से कम 10वीं व 12वीं की कक्षाएं शुरू करने की अनुमति दी जानी चाहिए.

    शिक्षक भी ऑनलाइन अध्यापन से परेशान हो गये हैं. यह सच है कि बच्चों की हेल्थ जरूरी है लेकिन बिना पढ़ाई छात्रों को कब तक घरों में कैद कर रखा जा सकता. राज्यभर में विविध तरह के आयोजन हो रहे हैं. राजनीतिक आंदोलन में हजारों की भीड़ उमड़ रही है. इन पर सख्ती की बजाय सरकार स्कूल-कॉलेजों पर सख्ती किये हुये है. सितंबर भी बीतने को आया है अक्टूबर तक आधा सत्र ही बीत जाएंगे. आखिर सरकार अब फैसला नहीं लेगी तो कब लेगी, यह सवाल पालकों द्वारा उठाया जा रहा है.