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    नागपुर. स्टेशनरी घोटाले के कारण मनपा की कार्यप्रणाली पर बुरा असर पड़ा हुआ है. चीफ अकाउंट्स एंड फाइनेन्स ऑफिसर (कैफो) कोल्हे 31 दिसंबर को रिटायर हो चुके हैं, जबकि स्टेशनरी घोटाले में वित्त विभाग का लेखाधिकारी राजेश मेश्राम पुलिस के हत्थे चढ़ने के बाद से निलंबित है. इससे मनपा के वित्तिय लेनदेने में प्रमुख भूमिका निभानेवाले 2 अधिकारी नहीं होने से पूरा वित्तीय लेन-देन अटका होने की जानकारी सूत्रों ने दी.

    सूत्रों के अनुसार वित्तीय लेन-देन अटका होने के कारण मनपा के विकास कार्यों पर बुरा असर पड़ रहा है. मनपा कर्मचारियों को वेतन और ठेकेदारों को विकास कार्य का भुगतान करने की प्रक्रिया अटकी हुई है. इससे न केवल मनपा कर्मचारी बल्कि कई महीनों पहले किए गए विकास कार्यों का भुगतान अटक जाने से ठेकेदारों के माथे पर बल पड़ने लगे हैं. सूत्रों के अनुसार कई ठेकेदारों के बिल बनकर तैयार हैं लेकिन जब तक लेखाधिकारी के उस पर हस्ताक्षर नहीं होंगे तब तक भुगतान के लिए चेक नहीं भेजे जा सकेंगे.

    सुधार के नाम पर अस्थायी रोक

    सूत्रों के अनुसार स्टेशनरी घोटाले में अधिकारियों के कम्प्यूटर और आईडी का गलत इस्तेमाल होने का मामला उजागर होने के कारण अब मनपा ने नई तकनीक का उपयोग करने का निर्णय लिया. इसके अनुसार यदि कम्प्यूटर पर लॉगिन किया गया तो उसके पूर्व संबंधित आधिकारिक व्यक्ति के मोबाइल पर इसकी जानकारी पहुंचेगी. साथ ही कम्प्यूटर पर लॉगिन के पहले ओटीपी मांगा जाएगा. ओटीपी मोबाइल पर जाने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी होगी.

    इस तरह की चाकचौबंद प्रक्रिया करने में प्रशासन जुटा हुआ है. हालांकि मनपा के पास पूरी तकनीकी टीम है लेकिन सुधार के नाम पर भुगतान पर अस्थायी रोक लगा दी गई है. कुछ ठेकेदारों का मानना है कि मनपा कर्मचारियों के वेतन कई बार ऑफलाइन पद्धति से जानकारी मांगकर भी किए जाते हैं. यदि कर्मचारियों को इस तरह से भुगतान संभव है तो विकास कार्यों की जिम्मेदारी निभाने वाले ठेकेदारों को भी उनका भुगतान दिया जाना चाहिए. अन्यथा दोनों के लिए एक ही कार्य पद्धति लागू होनी चाहिए. 

    ई-गवर्नेन्स पर भी असमंजस

    बताया जाता है कि फाइलों का आदान-प्रदान पुख्ता करने के लिए अब ई-गवर्नेन्स की कार्य पद्धति में कुछ सुधार किया जा रहा है. इसके लिए पूरा मामला अटका हुआ है. हालांकि विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे कुछ अधिकारी तो ई-गवर्नेन्स का काम सुचारु चलने की जानकारी दे रहे हैं किंतु कुछ कर्मचारी काम अभी भी चलने की जानकारी दे रहे हैं. इससे ई-गवर्नेन्स को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है.

    जानकारों के अनुसार प्रत्येक माह राज्य सरकार की ओर से वित्तीय अनुदान और जीएसटी जैसी वित्तीय सहायता मनपा को प्राप्त होती है. निधि प्राप्त होने के बाद वित्त विभाग की ओर से इसका नियोजन किया जाता है किंतु अब 2 प्रमुख अधिकारी ही नहीं होने से इसे लेकर भी असमंजस बना हुआ है. माना जा रहा है कि गत समय कुछ अंतराल के लिए मनपा में मुख्य वित्त अधिकारी नहीं था जिससे उसके स्थान पर प्रशासकीय अधिकारी की नियुक्ति की गई थी. किंतु प्रशासकीय अधिकारी को वित्तीय बारीकियों की जानकारी नहीं होने से मनपा को परेशानी उठानी पड़ी थी.