Mosquitoes continue to wreak havoc in Nashik, city battling dengue and chikungunya for several days

    नाशिक. पिछले महीने से शहर में डेंगू (Dengue) का प्रकोप चल रहा है और अब नाशिक (Nashik) के निवासी चिकनगुनिया से (Chikungunya) पीड़ित हो रहे हैं। इन दिनों नाशिक में 700 से अधिक चिकनगुनिया बीमारी के मरीज हैं। सूत्रों के अनुसार जिला अधिकारी सूरज मांढरे (Suraj Mandhare)भी चिकनगुनिया से संक्रमित हो चुके हैं। बताया जा रहा है कि निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। इसलिए वह पालक मंत्री छगन भुजबल की ओर से हुई बैठक में मौजूद नहीं थे। इस बैठक में पालक मंत्री ने प्रशासन को शहर में मच्छर भगाने और सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए।

    नाशिक वासियों के लिए सितंबर एक बार फिर खतरनाक महीना साबित हुआ। पिछले साल कोरोना से शहर तबाह हो गया था। अब इस साल लोग डेंगू और चिकनगुनिया की चपेट में आ गए हैं। 14 सितंबर तक शहर में डेंगू के 140 नए मामले सामने आए हैं, जबकि चिकनगुनिया के 95 नए मामले सामने आए हैं। अगस्त में डेंगू के 311 मरीज मिले थे। चिकनगुनिया के अब तक 210 मरीज मिले हैं। नाशिक में पिछले एक पखवाड़े से बारिश हो रही है। कभी लगातार बूंदाबांदी शुरु रहती है, तो कभी भारी झडी लग जाती है। इससे कई सोसायटियों में मच्छरों की पैदावार हो गई है, जिसके चलते डेंगू फैल गया है।

    मरीजों की संख्या में हुआ इजाफा  

    नाशिक में 2017 में डेंगू के 151 मरीज थे, जबकि चिकनगुनिया के 4 मामले थे। 2018 में डेंगू के मरीजों की संख्या 368 हो गई थी, जबकि चिकनगुनिया के 40 मामले पाए गए थे। 2019 में डेंगू के 177 मरीज थे। जबकि चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या बेहद कम रही है। सिर्फ 1 मरीज मिला था। 2020 में डेंगू के मरीजों की संख्या 115 थी, जबकि चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या 7 थी। लेकिन 2021 में डेंगू और चिकनगुनिया के रोगियों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। वर्तमान में शहर में डेंगू और चिकनगुनिया के हजारों मरीज हैं। सर्दी, बुखार, खांसी और बदन दर्द के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। कई निजी अस्पताल डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों से भरे पड़े हैं। कई अस्पतालों में मरीजों के लिए बेड नहीं मिलने के मामले सामने आ रहे हैं। कोरोना की तीसरी लहर आने की चर्चा भी जारी है। इन दिनों नाशिक निवासी डेंगू और चिकनगुनिया से त्रस्त नजर आ रहे हैं। नागरिकों की मांग है कि मनपा प्रशासन वार्डवार और मच्छरों के पैदा होने वाले स्थानों पर लगातार छिड़काव करते रहे।