Pimpri Chinchwad Municipal Corporation

    पिंपरी: पवना बांध (Pavana Dam) से पाइपलाइन (Pipeline) के जरिए पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (Pimpri-Chinchwad Municipal Corporation) के निगड़ी जलशुद्धिकरण केंद्र तक सीधे पानी लाने की योजना की अमलबाजी के लिए मावल तालुका (Maval Taluka) में जगह-जगह पर रखे लोहे के पाइप चिखली में स्थानांतरित करने का निर्णय दो वर्ष पूर्व लिया गया था। पाइप (Pipe) स्थानांतरित करने के लिए जल संसाधन विभाग ने 80 लाख रुपयों की मांग की थी। इसे सत्ताधारी भाजपा ने आरंभ में मंजूरी दी थी, लेकिन टेंडर प्रक्रिया के जरिए काम करने की भूमिका लेते हुए उसमें अड़ंगा डाला। अब दो वर्ष के बाद फिर बिना टेंडर प्रक्रिया के ही पाइप स्थानांतरित करने का फैसला किया गया है।  हालांकि अब इसी काम के लिए जल संसाधन विभाग ने 1 करोड़ 35 लाख रुपयों की मांग की है। भाजपा की लेटलतीफी के कारण करदाताओं के 55 लाख रुपये जाया गए हैं। 

    केंद्र सरकार के जवाहरलाल नेहरू नागरी पुनर्निर्माण अभियान (जेएनएनयूआरएम) के अंतर्गत पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका ने पवना बांध से पाइपलाइन द्वारा निगड़ी के सेक्टर-23 में स्थित जलशुद्धिकरण केंद्र तक सीधे पानी लाने की योजना गई बनाई थी। इस कार्य के लिए एनसीसी-एसएमसी-इंदू (जेवी) नामक कंपनी को 30 अप्रैल 2008 को वर्क ऑर्डर दिया गया था। इस कार्य के अंतर्गत ठेकेदार कंपनी ने मावल के कामशेत, कान्हेफाटा, बोऱ्हाडे बस्ती, वड़गांव मावल, ब्राह्मणवाड़ी, किवले और गहुंजे में जगह-जगह पर पाइप लाकर रखे थे। इस काम की अवधि दो वर्ष यानी 28 अप्रैल 2010 तक तय की गई थी, लेकिन पाइपलाइन कार्य को लेकर मावलवासियों ने विरोध की भूमिका अपनाए जाने से इसमें अवरोध निर्माण हुआ। स्थानीय किसानों ने इस परियोजना के विरोध में आंदोलन भी किया जिसे बाद में हिंसक मोड़ मिला। इसके बाद से यह परियोजना ठप्प पड़ी हुई है।

     लेनी होगी पुणे के जिला अधिकारी से अनुमति

    अब पवना बांध पाइपलाइन परियोजना का कार्य फिर से शुरू करने के लिए राज्य सरकार से आग्रह किया जा रहा है। 25 मार्च 2019 को पत्र के द्वारा ठेकेदार ने टर्मिनेशन की नोटिस जारी की। इस पत्र के अनुसार, मावल में रखे गए पाइप चिखली के नियोजित जलशुद्धिकरण केंद्र तक स्थानांतरित करने के लिए जल आपूर्ति विभाग से कहा गया, लेकिन वहां वनीकरण किए जाने के कारण पाइपों का स्थानांतरण वहां नहीं हो पाएगा। फिलहाल वहां रावेत में 7 से 8 हेक्टेयर क्षेत्र पर सरकारी चारागाह है, वहां पाइपलाइन स्थानांतरित करना तय किया गया लेकिन यह चारागाह महानगरपालिका के कब्जे में नहीं है। इसके लिए पुणे के जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होगी।

     फिर से संशोधित एस्टिमेट देने के लिए कहा 

     इन पाइपों का स्थानांतरण करने के लिए दापोड़ी स्थित जलसंसाधन विभाग के द्वार उत्पादन विभाग के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर ने 80 लाख रुपयों का एस्टिमेट दिया था। महानगरपालिका और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने इन स्थानों का दौरा भी किया है। यह संस्था सरकारी होने के कारण उसे सीधे काम देने में कोई हर्ज नहीं होने की टिप्पणी महानगरपालिका जल आपूर्ति विभाग ने दी है. साथ ही दापोड़ी स्थित जल संसाधन विभाग के गेट उत्पादन विभाग के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर को फिर से संशोधित एस्टिमेट देने के लिए कहा गया।

    खर्च में 55 लाख की बढ़ोतरी 

    दो वर्ष पूर्व गेट उत्पादन विभाग ने पाइप के स्थानांतरण के लिए 80 लाख रुपयों का एस्टिमेट दिया था। मगर 20 अगस्त 2021 के संशोधित एस्टिमेट में उन्होंने इसी काम के लिए 1 करोड़ 34 लाख 67 हजार रुपयों का संशोधित एस्टीमेट प्रस्तुत किया है। दो वर्षों में पाइप के स्थानांतरण के खर्च में 55 लाख रुपयों की बढ़ोतरी हुई है। भाजपा के अडंगे के कारण करदाताओं के 55 लाख रुपये पानी में चले गए हैं। असल में द्वार उत्पादन विभाग के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के एस्टिमेट को आरंभ में महानगरपालिका स्थायी समिति ने 24 जुलाई 2019 को मंजूरी दी थी, लेकिन पारदर्शी कामकाज का दम भरने वाली सत्ताधारी भाजपा ने इस काम में अड़ंगा लगाया। सीधे काम देने की बजाय टेंडर प्रक्रिया के जरिए काम करने से यह कार्य कम खर्च में होने का आत्मज्ञान भाजपा को हुआ था। इसके बाद स्थायी समिति ने 6 नवंबर 2019 को तीन महीने पहले का अपना ही प्रस्ताव रद्द करते हुए यह काम फिर से टेंडर प्रक्रिया के जरिए करवाने को मंजूरी दी। अब फिर से यही काम सीधे देने का निर्णय महानगरपालिका कमिश्नर ने लिया है। हालांकि इसमें देरी होने से इसका खर्च बढ़ गया है।