भाजपा केवल भ्रष्ट और रिश्वतखोरों के साथ, जमानत मिलते ही नगरसेविका आशा शेंडगे ने दागी तोप

    पिंपरी. स्मार्ट सिटी (Smart City) के सह शहर अभियंता और पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका कमिश्नर (Pimpri-Chinchwad Municipal Commissioner) की नेमप्लेट (Name Plate) पर स्याही पोतने के मामले में जेल में रही भाजपा (BJP) की नगरसेविका आशा शेंडगे (Corporator Asha Shendge) को हालिया जमानत (Bail) मिल गई है। बाहर आते ही उन्होंने महानगरपालिका मुख्यालय में संवाददाताओं के साथ की गई बातचीत में अपनी ही पार्टी के नेताओं पर तोप दागी। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल भ्रष्ट और रिश्वतखोरों के साथ खड़े रहती है। जनता के मसलों पर आंदोलन करने वालों का साथ देने की बजाय उनकी निंदा की जाती है। ऐसे नेताओं की बुद्धि पर दया आती है।

    उन्होंने महानगरपालिका कमिश्नर राजेश पाटिल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि नागरिकों के साथ आंदोलन करने के कारण सीधे धारा 353 के तहत की गई कार्रवाई अत्यंत अफसोसजनक है। महानगरपालिका कमिश्नर की ऐसी भूमिका के कारण शहर के करदाता नागरिकों, खासकर महिला, गिरफ्तार होते हैं और उन्हें जेल तक जाना पड़ता है, यह इस शहर के लिए सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात है। इस घटना को इतिहास में काली स्याही से लिखा जाएगा, इन शब्दों में नगरसेविका आशा शेंडगे ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जब-जब इस घटना का उल्लेख होगा तब-तब महानगरपालिका कमिश्नर राजेश पाटिल कितने छोटे दिल के हैं यह भी सामने आएगा।

     बार-बार करेंगे ऐसे आंदोलन

    स्थायी समिति की पूर्व अध्यक्षा सीमा सालवे की मौजूदगी में नगरसेविका आशा शेंडगे ने कहा कि  लोकतांत्रिक तरीके से नागरिकों की समस्याएं हल करवाने के लिए ऐसे आंदोलन बार-बार करने पड़ें तो भी पीछे नहीं हटेंगे फिर चाहे कितनी बार भी धारा 353 के तहत कार्रवाई की जाय उसके लिए तैयार हैं। हालांकि लोकतांत्रित तरीके से आंदोलन करने पर शहर के करदाता नागरिकों, खासकर महिलाओं को और वह भी त्यौहारों के समय में, गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए तो यह शहर के लिए सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में महानगरपालिका कमिश्नर को स्मार्ट सिटी के काम को लेकर मैंने और सीमा सालवे ने 15- 16 ज्ञापन सौंपे हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई न हमारी शिकायत पर गंभीरता से गौर नहीं किया गया।

    स्याही फेंककर अपना गुस्सा निकाला

    नगरसेविका शेडगे ने महानगरपालिका कमिश्नर राजेश पाटिल के बर्ताव को घमंड करार देते हुए कहा कि मेरे प्रभाग में केबल खुदाई का काम शुरु था। एक ही रास्ते की बार-बार और वो भी गणेशोत्सव के समय खुदाई करने से नागरिकों में गुस्सा था। नगरसेविका के नाते लोग मेरे पास आए और खुदाई काम बंद कराने का आग्रह किया। इससे दुर्घटना की संभावना बनी थी। आयुक्त राजेश पाटिल और सहशहर अभियंता अशोक भालकर ने फोन नहीं उठाया। हमारी मांग थी कि खुदाई का काम करना है तो प्रभाग के लोगों को विश्वास में लेकर समझाना पड़ेगा। खुदाई का काम करो, लेकिन पहले की तरह रास्ते को दुरुस्त करके ठीक करने की जिम्मेदारी भी ली जानी चाहिए। महानगरपालिका कमिश्नर ने फोन नहीं उठाया। इसलिए अपने प्रभाग की कुछ महिलाओं को लेकर  कमिश्नर से मिलने आयुक्तालय गई थी। मगर घमंडी महानगरपालिका कमिश्नर मिलने से इंकार कर दिया। महिलाओं को अपमान महसुस हुआ और स्याही फेंककर अपना गुस्सा निकाला।