अगर धुंआ उठ रहा है तो कहीं न कहीं आग जरूर लगी है: सांसद डॉ. अमोल कोल्हे

    पिंपरी : विपक्ष के सदस्यों की आवाज दबाने की कोशिश जारी रहने की शिकायतें मिलने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के सांसद डॉ. अमोल कोल्हे (MP Dr. Amol Kolhe) बुधवार को पिंपरी- चिंचवड़ महानगरपालिका (Pimpri- Chinchwad Municipal Corporation) की सर्वसाधारण सभा में पहुंचे। दोपहर दो बजे रात सवा नौ बजे तक वे सभागृह की गैलरी में डटे रहे। इसके बाद संवाददाताओं के साथ की गई बातचीत में उन्होंने अपना निरीक्षण दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि खुद सत्ताधारी भाजपा (BJP) के नगरसेवकों (Corporators) ने ही स्मार्ट सिटी की परियोजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। अपने नगरसेवकों द्वारा भ्रष्टाचार की बात स्वीकार किए जाने के बाद भाजपा द्वारा उसका ठीकरा प्रशासन पर फोड़ने की कोशिश की जा रही है।

    चौंकाने वाली बात यह है कि महापौर ने महानगरपालिका में विभिन्न विकास कार्यों को उपठेका देने पर सत्तादल को चुनौती दिए जाने के बाद सदन में विपक्ष के सदस्यों अपना मत व्यक्त करने से रोक दिया है। यह एक तरह से भ्रष्टाचार, गलत बात को छुपाने का चौंकाने वाला तरीका है। अगर धुंआ उठ रहा है तो कहीं न कहीं आग जरूर लगी है। खुद भाजपा के नगरसेवकों द्वारा भ्रष्टाचार की बात स्वीकार किए जाने के बाद उसका ठीकरा प्रशासन पर फोड़ने की कोशिश की जा रही है। सत्ताधारी दल के मुट्ठी भर नेताओं के रिश्तेदारों को अगर आम आदमी के कर रूपी जमा पैसों का गबन किया जा रहा है तो हमें इसकी जड़ तक जाना होगा, करदाताओं के पैसों की लूट-खसोट बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, यह भी अमोल कोल्हे ने स्पष्ट किया।

    अहम प्रस्तावों पर चर्चा तक नहीं की गई

    सभागृह में बुनियादी मुद्दों पर चर्चा न कर छह घंटे में से पांच घंटे दूसरी चर्चा में व्यर्थ गंवाएं। भाजपा पार्षदों ने भी सदन में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से स्मार्ट सिटी भ्रष्टाचार की बात स्वीकार की। इसका मतलब है कि अब सब कुछ प्रशासन पर दोष मढ़ने की कोशिश हो रही है, ऐसी शंका उत्पन्न होती है। बैठक में उठाए गए मुद्दों पर पैनी नजर रखी जा रही है और स्वीमिंग पूल का किराया बढ़ाने, सड़कों की यांत्रिक सफाई जैसे अहम प्रस्तावों पर चर्चा तक नहीं की गई। उल्टे वे प्रस्ताव स्थगित किए गए। इससे सभी को ठीक-ठीक समझ में आ गया है कि पदाधिकारी क्या छिपाना चाहते थे। यह हमारे धैर्य की जांच करने का प्रयास होना सकता है। 

    बहुत कुछ छिपाना चाहते हैं 

    डॉ. कोल्हे ने कहा कि बहुत कुछ छिपाना चाहते हैं और आयुक्तों को निशाना बनाना चाहते हैं?  आयुक्त को क्यों बनाया निशाना?  आशंका जताई जा रही है कि पिछले साढ़े चार साल में प्रशासनिक कार्य से अलग कार्य करने के बाद अब आयुक्तों को निशाना बनाया जा रहा है, यह शंका उपस्थित हो रही है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा कि टैक्सपेयर्स का पैसा उड़ाया जा रहा है।