DRDO ने ओडिशा तट से किया ‘अभ्यास’ का सफलतापूर्वक परीक्षण, जानें क्या है इसकी खासियत

    भुवनेश्वर. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने शुक्रवार को ओडिशा में बंगाल की खाड़ी के तट पर एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) चांदीपुर से हाई-स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट (हिट) ‘अभ्यास’ का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इस यान को भारत में ही विकसित किया गया है।  

    परीक्षण के दौरान लक्ष्य को जमीन-आधारित नियंत्रक से सबसोनिक गति से पूर्व-निर्धारित उड़ान पथ में उड़ाया गया था। इस यान का इस्तेमाल अनेक मिसाइल प्रणालियों का मूल्यांकन करने के लिए हवाई लक्ष्य के तौर पर किया जा सकता है। मई 2019 में इसका पहली बार सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया गया था।

    परीक्षण उड़ान के दौरान, लूप में रेडियो अल्टीमीटर के साथ कम ऊंचाई वाली उड़ान क्षमता का प्रदर्शन किया गया। परीक्षण उड़ान के दौरान ग्राउंड स्टेशन से आईआर फ्लेयर्स प्रज्वलित किए गए।

    ‘अभ्यास’ को एंडो-वायुमंडलीय, सतह से हवा और हवा से हवा में अवरोधन मिसाइल परीक्षण के लिए विमान का अनुकरण करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

    DRDO के सूत्रों ने कहा कि रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल निगरानी प्रणाली (ईटीओएस) समेत दूरमापी तथा अनेक सेंसरों के माध्यम से लक्षित यान के कामकाज पर निगरानी रखी गई।

    पूरी तरह से स्वायत्त उड़ान में सक्षम ‘अभ्यास’ गैस टर्बाइन इंजन पर चलता है ताकि सबसोनिक गति पर लंबी उड़ान भरी जा सके। इसका जड़त्वीय नेविगेशन माइक्रो-इलेक्ट्रोमैकेनिकल सिस्टम का उपयोग करता है और मार्गदर्शन और नियंत्रण एक उड़ान नियंत्रण कंप्यूटर द्वारा प्रबंधित किया जाता है। इसे भारतीय सशस्त्र बलों के लिए DRDO के वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान (ADE) बेंगलुरू ने डिजाइन और विकसित किया है।

    ‘अभ्यास’ को एक मोबाइल लॉन्चर से दो 68 मिमी बूस्टर रॉकेट की मदद से लॉन्च किया जाता है, जो ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों में निर्मित होते हैं। इसके प्रक्षेपण चरण के अंत में बर्नआउट बूस्टर रॉकेट को बंद कर दिया जाता है। इसके बाद, क्रूज चरण के दौरान मुख्य गैस टर्बाइन इंजन वाहन को शक्ति प्रदान करता है।