We will definitely win the war against Naxalites: Hemant Soren

    ओमप्रकाश मिश्र 

    रांची. नई दिल्ली (New Delhi) स्थित विज्ञान भवन में “वामपंथी उग्रवाद” पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक (High Level Meeting) को संबोधित करते हुए झारखंड (Jharkhand) के मुख्यमंत्री (Chief Minister) हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने कहा कि सरकार (Government) की साकारात्मक पहल से उग्रवाद की घटनाओं में कमी आई हैI वर्ष 2016 में 195 उग्रवादी घटनाएं हुई थीं। जबकि वर्ष 2020 में उग्रवाद की घटनाओं में कमी आने से यह संख्या घटकर 125 रह गई है। वर्ष 2016 में उग्रवादियों द्वारा 61 आम नागरिकों की हत्या की गई थी, वर्ष 2020 में इस तरह की 28 घटनाएं घटी। इस अवधि में कुल 715 उग्रवादी गिरफ्तार किए गए जबकि पुलिस मुठभेड़ में 18 उग्रवादियों को मार गिराया गया था। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उग्रवादी संगठनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इन अभियानों के फलस्वरूप राज्य में उग्रवादियों की उपस्थिति मुख्य रूप से पारसनाथ पहाड़, बूढ़ा पहाड़, सरायकेला, खूंटी, चाईबासा, कोल्हान क्षेत्र और बिहार के कुछ सरहदी इलाके तक सीमित रह गई है। हेमंत ने आम लोगों को विश्वास दिलाते हुए कहा कि वह दिन दूर नहीं जब इन स्थानों से भी वामपंथी उग्रवाद का सफाया किया जा सकेगा।

    मुख्यधारा में वापस लाने का हो रहा प्रयास 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2020 और 2021 के अगस्त तक 27 उग्रवादियों द्वारा आत्मसमर्पण भी किया गया है। राज्य की आकर्षक आत्मसमर्पण नीति का प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। कम्युनिटी पुलिसिंग के द्वारा भटके युवाओं को मुख्य धारा में वापस लाने का प्रयास हो रहा है। राज्य सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं के लिए ‘सहाय’ योजना लेकर आ रही है, जिसके अंतर्गत इन क्षेत्रों में विभिन्न खेलों के माध्यम से युवाओं और अन्य लोगों को जोड़ा जायेगा।

    राशि की मांग करना व्यवहारिक नहीं 

    सोरेन ने कहा कि उग्रवाद की समस्या केंद्र और राज्य सरकार दोनों के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसी परिस्थिति में केंद्रीय सुरक्षा बलों की प्रतिनियुक्ति के बदले भारत सरकार द्वारा राज्य सरकारों से राशि की मांग करना व्यवहारिक प्रतीत नहीं होता है। इस मद में झारखंड के विरुद्ध अबतक 10 हजार करोड़ रुपये का बिल गृह मंत्रालय द्वारा दिया गया है। सोरेन ने कहा कि मेरा अनुरोध होगा कि इन बिलों को खारिज करते हुए भविष्य में इस तरह का बिल राज्य सरकारों को नहीं भेजने का निर्णय भारत सरकार द्वारा लिया जाये। 

    नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में योजनाएं अचानक बंद न हो 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार द्वारा समय-समय पर उग्रवाद के उन्मूलन हेतु कई योजनाएं लागू की गई हैं। इन योजनाओं से विशेष लाभ भी मिला है, परंतु ऐसा देखा गया है कि कुछ जिलों के लिए इन योजनाओं को अचानक बंद कर दिया गया, जिससे उग्रवाद उन्मूलन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को आघात पहुंचा है। इन योजनाओं को अचानक बंद कर देने से उग्रवाद को पुनः पैर पसारने का मौका मिल सकता है। इसी संदर्भ में विशेष केंद्रीय सहायता के तहत् प्रति जिला 3300 करोड़ रुपये की राशि भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। प्रारंभ में यह योजना 16 जिलों के लिए स्वीकृत की गई थी, परंतु इस वर्ष यह योजना मात्र 08 जिलों के लिए जारी रखी गई है। इसी प्रकार एसआरई योजना से कोडरमा, रामगढ़ और सिमडेगा को बाहर कर दिया गया है। अतएव मेरा अनुरोध होगा कि दोनों योजनाओं को सभी नक्सल प्रभावित जिलों के लिए अगले पांच वर्षों तक जारी रखा जाए।

    मनरेगा मजदूरी दर और पेंशन राशि बढ़े 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की दशा को सुधारने में मनरेगा एक कारगर उपाय है। मनरेगा झारखंड में बहुत मजबूती से आगे बढ़ रहा है। परंतु, झारखंड के श्रमिकों को जो मजदूरी दर मिल रही है, वह देश में सबसे कम है। अन्य राज्यों में 300 रु / दिन से ज्यादा मिल रही है, मगर झारखंड में 200 रु. भी नहीं। हमने राज्य की निधि से मजदूरी बढ़ाने का निर्णय लिया है। मेहनतकश झारखंडियों को भी मनरेगा के तहत सही मजदूरी मिलनी चाहिए। सामाजिक सुरक्षा के तहत भारत सरकार के द्वारा जो विभिन्न पेंशन योजनाएं चलाई जा रही हैं उसे फिर से देखने की जरूरत है। अभी भी भारत सरकार एक वृद्ध / विधवा / दिव्यांग को प्रति महीने जीवनयापन सहायता के रूप में मात्र 250  रुपये प्रति महीने देती है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र जहां जीविकोपार्जन अन्य क्षेत्रों से ज्यादा कठिन है, वहां के लिए तो यह राशि बढ़नी ही चाहिए।  

    शिक्षा के लिए विद्यालयों की संख्या बढ़े 

    हेमंत सोरेन  ने कहा कि राज्य में 192 एकलव्य विद्यालय स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 82 उग्रवाद प्रभावित जिलों में स्थापित होंगे। मेरा अनुरोध होगा कि एकलव्य विद्यालय की स्वीकृति हेतु निर्धारित मापदंड में 50% की शर्त को समाप्त किया जाए, ताकि आदिवासी बहुल ग्रामीण क्षेत्रों को इस योजना का लाभ मिल सके। झारखंड में 261 प्रखंड हैं, परंतु मात्र 203 प्रखंडों में ही केंद्र सरकार की सहायता से कस्तूरबा विद्यालय का निर्माण किया गया। 57 विद्यालय राज्य सरकार अपनी निधि से प्रारंभ की है। राज्य की बेटियां इन विद्यालयों में नामांकन चाहती हैं। झारखंड जो सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित हैं, वहां 100 कस्तूरबा विद्यालयों के लिए केंद्र सरकार सहयोग करें। नक्सल विरोधी अभियान में हमारी सरकार एवं केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय हमेशा बना रहेगा और मैं आशा करता हूं कि हम सब मिलकर इस युद्ध को अवश्य जीत पाएंगे।