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    -राजेश मिश्र

    लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आर्थिक रुप से कमजोर लोगों के लिए बनाए जाने वाले मकानों के आवंटी अब आसानी से उनकी खरीद-बिक्री नहीं कर सकेंगे। उत्तर प्रदेश में दुर्बल और अल्प आय वर्ग (ईडब्लूएस और एलआईजी) के कोटे के मकान (Houses) खरीदने वाले इन्हें पांच साल तक बेंच नहीं सकेंगे। सरकार पांच साल तक खरीद-बिक्री पर रोक का यह प्रतिबंध निजी और सरकारी दोनों क्षेत्र की आवासीय योजनाओं के ईडब्लूएस (EWS) और एलआईजी (LIG) मकानों के लिए लागू करेगी। प्रदेश सरकार की पहल पर आवास विभाग के सचिव की अध्यक्षता में गठित अधिकारियों की एक समिति ने यह प्रस्ताव तैयार किया है।

    प्रदेश सरकार ने यह समिति बड़ी तादाद में गरीबों के लिए बनाए जा रहे मकानों की रीसेल को रोकने के लिए सुझाव तैयार करने के लिए गठित की थी। समिति ने इन मकानों की दोबारा बिक्री को पांच साल के लिए प्रतिबंधित करने की सिफारिश की है। निजी क्षेत्र के विकासकर्त्ताओं के साथ ही बड़ी रियल्टी कंपनियों ने सरकार के पास प्रतिवेदन देकर ईडब्लूएस और एलआईजी मकानों की बड़े पैमाने पर हो रहे रीसेल की ओर ध्यान दिलाया था। रियल्टी कंपनियों का कहना था कि सरकारी निर्देशों के मुताबिक तय कम कीमत पर मकान खरीदने के बाद उन्हें ऊंचे दामों पर बेंचा जाता है। जिस पर रोक लगायी जानी चाहिए।

    पांच साल का अनुबंध किया जाएगा

    प्रदेश सरकार की ओर से तय सीमा के मुताबिक ईडब्लूएस के मकान की अधिकतम कीमत 4.50 लाख रुपए और निर्मित क्षेत्रफल कम से कम 35 वर्गमीटर तय किया गया है। वहीं एलआईजी मकानों का निर्मित क्षेत्रफल कम से कम 41 वर्गमीटर और अधिकतम कीमत 9 लाख रुपए तय की गयी है। समिति के मुताबिक, अब ईडब्लूएस या एलआईजी के मकानों के आवंटियों के साथ बिक्री के साथ ही निबंधन की बजाय पांच साल का अनुबंध किया जाएगा। इसके तहत मकान तो आवंटी को रहने के लिए दे दिया जाएगा पर उसका दस्तावेजों में हस्तांतरण पांच सालों के बाद किया जाएगा। उक्त अवधि तक आवंटी इन मकानों को नहीं बेंच सकेगा। समिति में विकास प्राधिकरणों के अधिकारियों का भी शामिल किया गया था।

    पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर आवंटित करने का निर्देश 

    समिति की सिफारिश के आधार पर आवंटन संबंधी पुरानी नियमावली को संशोधित करते हुए पांच साल के अनुबंध को शामिल कर दिया गया है। नए नियमों के मुताबिक, अब आवंटियों को मकानों का निबंधन उनके पक्ष में पांच साल के बाद ही किया जाएगा। हालांकि उक्त अवधि के बीच मकान पर आवंटी को कब्जा दे दिया जाएगा। समिति ने बिल्डरों को ईडब्लूएस के मकान बेंचने के लिए कम से कम तीन बार बुकिंग खोलने और बिक्री न होने की दशा में पहले आओ पहले पाओ के आधार पर आवंटित करने का निर्देश दिया है।