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    नयी दिल्ली. ऑनलाइन मंच लोकलसर्किल के हालिया सर्वेक्षण में शहरी क्षेत्रों में रह रहे लगभग 40 फीसदी अभिभावकों ने नौ से 17 साल के अपने बच्चों के वीडियो देखने, गेम खेलने और सोशल मीडिया की लत का शिकार होने की बात स्वीकार की है। सर्वे में शामिल 40 फीसदी माता-पिता ने माना है कि नौ से 17 साल के उनके बच्चे रोजाना औसतन तीन घंटे वीडियो देखने, ऑनलाइन गेम खेलने और सोशल मीडिया साइट का इस्तेमाल करने में बिताते हैं। 13 से 17 साल के किशोर-किशोरियों में वीडियो, ऑनलाइन गेम और सोशल मीडिया की लत होने की बात स्वीकारने वाले अभिभावकों की संख्या और भी अधिक थी।

    लोकलसर्किल ने कहा, “भारत के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले हर 10 में से चार अभिभावक मानते हैं कि नौ से 17 साल के उनके बच्चे वीडियो, ऑनलाइन गेम और सोशल मीडिया की लत के शिकार हैं। यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है और सरकारों, स्कूलों, अभिभावकों और इन सेवाओं की पेशकश करने वाले मंचों को इस पर ध्यान देने की जरूरत है।”

    जनवरी से नवंबर 2022 के बीच किए गए इस सर्वे में भारत के 287 जिलों में रहने वाले अभिभावकों ने अलग-अलग सवालों पर 65 हजार से अधिक प्रतिक्रियाएं दीं। शहरी क्षेत्रों में रहने वाले कम से कम 62 फीसदी अभिभावकों ने माना कि 13 से 17 साल के उनके बच्चे रोजाना औसतन तीन घंटे या उससे अधिक समय वीडियो देखने, ऑनलाइन गेम खेलने और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने में गुजारते हैं।

    नौ से 13 साल के बच्चों के मामले में समान प्रतिक्रिया जाहिर करने वाले अभिभावकों की संख्या 49 फीसदी दर्ज की गई। ज्यादातर सोशल मीडिया और ऑनलाइन वीडियो मंचों ने भले ही अकाउंट बनाने के लिए 13 साल की न्यूनतम आयु सीमा निर्धारित कर रखी है, लेकिन शहरी क्षेत्र के 47 फीसदी अभिभावकों ने स्वीकार किया है कि नौ से 13 साल के उनके बच्चे बुरी तरह से वीडियो, ऑनलाइन गेम और सोशल मीडिया की लत के शिकार हैं। 13 से 17 साल के बच्चों के मामले में ऐसी प्रतिक्रिया देने वाले माता-पिता की संख्या 44 प्रतिशत थी। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय शहरों में रह रहे 68 फीसदी अभिभावकों का मानना है कि सोशल मीडिया साइट पर अकाउंट बनाने की न्यूनतम आयु सीमा 13 साल से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दी जानी चाहिए।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि गैजेट का अत्यधिक इस्तेमाल और महामारी के दौरान पढ़ाई ऑनलाइन होने के कारण बच्चों को कम उम्र से इंटरनेट तक पहुंच प्रदान करना उनके सोशल मीडिया, वीडियो और ऑनलाइन गेम की लत का शिकार होने की मुख्य वजहें हैं।

    लोकलसर्किल ने कहा, “भारतीय शहरों में रह रहे बच्चों को पढ़ने-लिखने, कुछ नया सीखने और मनचाहे करियर में कामयाबी के रास्ते पर अग्रसर होने में इंटरनेट और गैजेट्स का रचनात्मक इस्तेमाल सुनिश्चित करने में सक्षम बनाने के लिए सरकारों, अभिभावकों और स्कूलों को साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। अगर वे ऐसा करते हैं, तो बच्चों के उनकी पिछली पीढ़ियों के मुकाबले कहीं बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना बढ़ सकती है।” (एजेंसी)