Zilla Parishad Thane

    ठाणे. ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों (Economically Backward Families) में बोरी का झूला बनाकर उसमें नवजात शिशु को झुलाया जाता है। इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे बचने के लिए जिला परिषद (Zilla Parishad) ने अभिनव उपक्रम (Innovative Initiatives) शुरू किया है। इसके तहत जिला परिषद जरूरतमंदों को झुले का वितरण करने का निर्णय लिया है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक मान्यता है कि नवजात शिशु को कपड़े में लपेटकर बोरी में रखना बेहतर होता है। जिला परिषद के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक उनकी यह गलतफहमी नवजात शिशुओं में बांझपन का कारण बन सकती है। ठाणे जिला परिषद के महिला एवं बाल विकास विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए ठाणे जिले के ग्रामीण इलाकों को इस समस्या से मुक्त कराने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता फैलाई जा रही है। ठाणे जिले का अधिकांश भाग आदिवासी बहुल है और आज भी ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी पुरानी परंपराओं के शिकंजे में फंसे हुए है। इस क्षेत्र के नागरिक अभी भी रोजगार के लिए पलायन कर रहे हैं। यह अक्सर दिखाता है कि नवजात शिशुओं सहित उनके पालन-पोषण की उपेक्षा की जाती है। पारंपरिक चाइल्डकेयर भी कुपोषण जैसी समस्याओं का कारण बनता है।

    ठाणे जिला परिषद के महिला एवं बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग बच्चों के पोषण, स्वच्छता और शीघ्र सुरक्षा के प्रति अभिभावकों के नजरिए को बदलने के लिए लगातार काम कर रहे है। ग्रामीण इलाकों में आज भी घर में बच्चों के सोने के लिए साड़ियां बनाई जाती है। इसमें बच्चों के लिए सांस लेना मुश्किल बनाता है, क्योंकि इस पारंपरिक झुले में पर्याप्त हवा नहीं पहुंच पाती है। इसके साथ ही बच्चों की हरकतों की एक सीमा होती है। नवजात को अधिक समय तक संकरे झुले में रखने से उनका विकास रुक सकता है और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। नतीजन, ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषित बच्चे बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।