बनारस: गंगा में चलेंगी सीएनजी से नाव और स्टीमर

– राजेश मिश्र

लखनऊ: पीएम मोदी के लोकसभा क्षेत्र बनारस शहर के प्रमुख आकर्षण, गंगा नदी में जल्द ही सीएनजी से चलने वाली नाव और बजरें पर्यटकों को ढोएंगे। गंगा को प्रदूषण से बचाने और बनारस में पर्यटकों का आकर्षण बढ़ाने के लिए अब सीएनजी आधारित जल परिवहन की शुरुआत की जाएगी। सीएनजी चलित नावों के लिए गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) गंगा घाट पर ही फिलिंग स्टेशन बनाएगी।

डीजल से चलने वाली बोट व स्टीमर होगी बंद

गेल की तैयारी के मुताबिक, अगले साल जनवरी से बनारस में गंगा नदी में सीएनजी से नांव और स्टीमर चलने लगेंगे। हालांकि, इस सबके बाद भी गंगा में हाथ से चलने वाली नांवों का संचालन जारी रहेगा। सीएनजी सुविधा के बाद वाराणसी में गंगा घाटों पर जल्दी ही डीजल से चलने वाली बोट व स्टीमर बंद कर दिए जाएंगे। वाराणसी में गंगा किनारे खिड़किया घाट पर सीएनजी स्टेशन बनाया जा रहा है जो अगले महीने तक बनकर तैयार हो जाएगा। फिलहाल यह व्यवस्था पायलट प्रोजेक्ट के तहत अस्थायी रूप से की जा रही है। इसके बाद गंगा घाट के नजदीक ही कहीं दो हजार वर्ग मीटर जमीन पर स्थायी तौर पर सीएनजी स्टेशन तैयार किया जाएगा।

नाविकों व पर्यटकों की सुविधा के लिए गंगा तट पर ही मिलेगी सीएनजी

नाविकों और पर्यटकों की सहूलियतों को ध्यान में रखते हुए सरकार की ओर से गंगा तट पर ही सीएनजी मुहैया कराने के लिए फिलिंग स्टेशन स्थापित किया जा रहा है जो जनवरी में ही शुरू हो जाएगा। गेल इंडिया के वाराणसी में मौजूद अधिकारियों के मुताबिक इस स्टेशन पर 45 हजार लीटर सीएनजी स्टोर करने की क्षमता होगी। यहां पर रिंग रोड पर स्थापित मदर स्टेशन से एलसीवी (लाइट कमर्शियल व्हीकल) के जरिए गैस मंगाई जाएगी। इसके बाद यहां पर गैस स्टोर की जाएगी। वाराणसी में गंगा किनारे खिड़किया घाट पर जेटी पर डिस्पेंसर लगाया जा रहा है जिससे नावों में गैस भरी जाएगी।

शहर में हजार से अधिक सीएनजी आटो और चार हजार लोगों के किचन तक पीएनजी

गौरतलब है कि, वाराणसी शहर में गेल इंडिया की ओर से 10 सीएनजी स्टेशन शुरू किए गए हैं। यहां पर पांच हजार से अधिक आटो सीएनजी से चल रहे हैं। साथ ही करीब चार हजार लोगों के किचन तक पीएनजी पहुंच रही है। वाराणसी शहर के उत्तरी छोर पर स्थित खिड़किया घाट को स्मार्ट सिटी के तहत विकसित किया जा रहा है। इसके जीटी रोड से सटे होने के कारण आवागमन आसान है और लोग वाहन से घाट के पास तक पहुंच सकते हैं। इस  घाट पर 36 करोड़ की लागत से अंतरराष्ट्रीय पर्यटन सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

घाटों पर लगेंगी लेजर लाइटें, किया गया सौंदर्यीकरण, हुई जल परिवहन की शुरुआत

हाल ही में वाराणसी से गंगा के रास्ते बंगाल तक जाने के लिए जल परिवहन की शुरुआत की गयी है। वाराणसी में गंगा को पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाने के लिए घाटों पर लेजर लाइटें लगाने के साथ ही उनका सौंदर्यीकरण किया गया है। गौरतलब है कि, वर्तमान में धर्म-अध्यात्म एवं पर्यटन की नगरी वाराणसी में गंगा नदी में करीब एक हजार लाइसेंसी नावें चलती हैं। इनमें से अधिकतर नावें डीजल इंजन से चलाई जाती हैं जिससे गंगा में प्रदूषण होता है। साथ ही नाविकों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ता है। सीएनजी चलित नावों के चलने के बाद नाविकों को फायदा होगा और गंगा में प्रदूषण से भी बचा जा सकेगा।