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विजयगोपाल. कोरोना व लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था की हालत पूरी तरह से खस्ता हो गई है. परिणाम स्वरुप अनेक जनपयोगी योजनाओं का बंटाढ़ार हो रहा है. किसानों के लिए महत्वपूर्ण सिंचाई कुओं का अनुदान भी अधर में लटका होने से अब किसानों की समस्या बढ़ गई है.

किसानों को मुख्य प्रवाह में लाने के लिए राज्य शासन द्वारा अनेक कल्याणकारी योजना चलाई जा रही है. इन योजनाओं के लिए अतिशीघ्र से अनुदान राशि उपलब्ध की जाती है. परंतु मार्च के अंत में कोरोना संक्रमण व लॉकडाउन लगने से राज्य की अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई है. परिणाम स्वरुप शासन स्तर पर अनेक योजनाओं को ब्रेक लग गया. लेकिन तहसील में गत वर्ष किसानों के लिए वरदान साबित होनेवाली सिंचाई कुआ योजना का अनुदान नही मिलने से किसान संकट में पड गए है.

योजना का नहीं मिला पूरा लाभ

देवली तहसील परिसर में धडक सिंचाई योजना अंतर्गत 341 लाभार्थी किसानों को कुएं मंजूर किए गए है. वर्ष 2019-20 में कुएं मंजूर हुए. उसमें से 80 किसानों ने कुओं की खुदाई व निर्माणकार्य शुरू किया था. परंतु उनमें से केवल 25 कुएं ही पूर्ण हुए. शेष कुएं अभी भी अधर में है. गत वर्ष फरवरी माह में 80 लाख रुपए पंचायत समिति की ओर कुओं की खुदाई के लिए आये थे.

इस आधार पर कुछ किसानों ने कुएं की खुदाई व निर्माणकार्य शुरू किया था. परंतु उनमें से 25 कुएं पूर्ण हो सके, शेष 55 कुओं का अनुदान अभी भी अटका हुआ है. जिसके लिए 1 करोड़ 15 लाख रुपयों की आवश्यकता है. उनमें से 50 लाख रुपए के कार्य पूर्ण होकर उसके बिल भी भेजे जाने की जानकारी है.

शेष  261 कुओं का काम शुरू करने पत्र शासन ने अबतक किसानों को नही दिया है. इस काम के लिए 6 करोड़ रुपयों की निधि की आवश्यकता है. जिन किसान लाभार्थियों ने कुओं की खुदाई व निर्माणकार्य शुरू किया, उन लाभार्थियों को अनुदान की पहली किश्त मिली है. लेकिन शेष अनुदान अबतक नही मिला. खेती की आय से कुएं निर्माणकार्य में राशि लगाने का नियोजन किसानों ने किया था. कुछ किसानों ने अनुदान का इंतजार न करते काम शुरू किया. परंतु अब किसानों को ही आर्थिक नुकसान सहना पड़ा.

शासन ने की अनुदान की मांग

तहसील में धडक सिंचाई कुआ योजना अंतर्गत 341 किसानों को कुएं मंजूर हुए. परंतु अनुदान के अभाव में लाभार्थियों को राशि नहीं मिली. जिससे अब शेष  कुओं का निर्माणकार्य नही हो सकता. इसके लिए शासन की ओर 1 करोड़ की निधि की मांग की गई है.

-अनिल आदेवार, कृषि अधिकारी, पंस देवली.