IMRAN
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    नई दिल्ली/इस्लामाबाद. सुबह कि एक और बड़ी खबर के अनुसार पाकिस्तान के पीएम इमरान खान (Imran Khan) को एक बार फिर जोर का झटका लगा है। जी हाँ इमरान की नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पार्टी के मुख्य गठबंधन सहयोगी मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान (MQM) ने विपक्षी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के साथ हाथ मिला लिए हैं। इसके साथ ही अब इमरान सरकार ने पाकिस्तान संसद के निचले सदन में अपना जरुरी बहुमत खो दिया है। 

    क्या है घटनाक्रम 

    इस बाबत PPP अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने अपने एक ट्वीट कर इसकी जानकारी दी और लिखा कि “संयुक्त विपक्ष और MQM अब एक समझौते पर पहुंच गए हैं। राबता समिति MQM और PPP सीईसी उक्त समझौते की अब जरुरी पुष्टि करेंगे। इसके बाद हम कल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के साथ विवरण साझा करेंगे। बधाई हो पाकिस्तान।”

    वहीं बीते मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए, PML(N) के राणा सनाउल्लाह ने दावा किया कि अगर वे अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन को शामिल करते हैं, तो विपक्ष इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार को गिराने और 190 के करीब पहुंचने में भी सक्षम हो जायेगा।

    समझे पाकिस्तानी राजनीति के गणित को 

    फिलहाल नेशनल असेंबली में 177 सदस्यों के साथ, विपक्ष के पास अब अधिक संख्या में समर्थक जुट गए हैं। वहीं पकिस्तान में वर्तमान इमरान खान सरकार के पास संसद में केवल 164 सदस्य ही बचे रह गए हैं। बता दें कि पाकिस्तानी नेशनल असेंबली में कुल 342 सदस्य हैं, जिसमें बहुमत के लिए 172 जरुरी सदस्य चाहिए। 

    पहले PTI के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास 179 सदस्यों का जरुरी समर्थन था। लेकिन अब, MQM-P के पार्टी छोड़ने के बाद, PTI के पास सिर्फ 164 सदस्य ही रह गए हैं। वहीं विपक्ष के पास अब नेशनल असेंबली में समर्थकों की संख्या लुल जमा 177 हो गई है।

    इमरान खान के संगीन आरोप

    गौरतलब है कि इसके पहले भी इमरान खान ने यह संगीन आरोप लगाया था कि कुछ लोग विदेशी फंड की मदद से उनकी सरकार को गिराने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। वहीं जियो टीवी की एक रिपोर्ट की मानें तो, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव 3 अप्रैल को आने की पुरजोर उम्मीद है। चर्चा के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। वहीं पाकिस्तान की अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार के भाग्य का फैसला 4 अप्रैल को होगा, जब अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होगा। कुल मिलाकर अप्रैल का महिना पाकिस्तान के वजीरे आजम इमरान खान के लिए भारी साबित होने वाला है ।