उमेद का घोटाला मामला अब सोशल मीडिया पर

  • मामले को दबाने के लिए जांच अधिकारी पर कौन दबाव बना रहा है? चर्चा जोरों पर

उमरखेड. तीन महीने पहले उजागर हुए पंचायत समिति अंतर्गत महाराष्ट्र ग्रामीण जिवन्नोति अभियान प्रकल्प (उमेद) के तहसील टीम की ओर से अर्थवेद बायो या कृषि दवा कंपनी की ओर से तहसील के बचत गुटों को महंगे दामों में बिक्री किए गए मामले के लाखों की अनियमितता होने के मामले में जांच के लिए जिला परिषद व पंचायत समिति स्तर पर दो समितियां नियुक्त कर दो महीने से जांच शुरू नहीं हुई है.

इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा की लहर है. महाराष्ट्र ग्रामीण जिवन्नोति अभियान प्रकल्प (उमेद) के तहसीलस्तरीय टीम ने ग्रामीण क्षेत्र की महिला बचत गुटों पर दबाव डाला और उन्हें अर्थवेद बायो इस कृषि औषधी कंपनी से दवा खरीदीने के लिए मजबूर किया. इस दवा की एक बोतल की किमत 200 रुपए होने के बाद भी 1200 रुपए में बिक्री कर महिला बचत गुटों की लाखों से ठगी की. 

बचत गुटों के खातों से राशि अर्थदेव बायो इस कंपनी के बैंक खाते पर आरटीजीएस से पैसे जम कर कमीशन स्वरूप की राशि आरटीजीएस से संबंधित अधिकारी व कर्मचारी टीम के बैंक खाते कंपनी ने जमा करने जानकारी प्राप्त हुई. पंचायत समिति सभापति इस मामले को रफादफा करने के प्रयास में रहते समय जहां एक ओर वक्ता इस मामले को प्रकाश में लाने के लिए ठोस प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर, इस मुद्दे को हल करने के लिए वरिष्ठ स्तर से बल के उपयोग के कारण यह भी पता चला है कि पंस स्तर की जांच समिति के सचिव और मौजूदा समूह विकास अधिकारी ने दबाव में आकर पूछताछ करने में असमर्थता जताई है, ऐसा विश्वसनिय सूत्रों से जानकारी प्राप्त हुई है. बचत समुह की आर्थिक लूट करनेवालों पर कार्यवाही कब होगी? इस ओर सोशल मीडिया पर चर्चा जोरों पर है.