Fast food restaurants do not affect children's weight
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    अमरावती. कोरोना महामारी से कई लोगों के परिवार उजड गए है. इससे छोटे बच्चे भी अछूते नहीं रहे है. कोरोना काल में 85 बच्चों ने अपना छत्र खोया है. जिसमें 62 बच्चों के पिता और 16 बच्चों की माताओं की मौत हुई है. जबकि 7 बच्चों के माता-पिता दोनों की मौत हो चूकी हैं. बाल न्याय व देखभाल संरक्षण अधिनियम 2015 के अनुसार अनाथ बच्चों का पालन किया जाएगा. 

    विभाग को प्राप्त हुई सुची

    कोरोना महामारी से जिन बच्चों के माता पिता की मौत हुई है. ऐसे बच्चों की जानकारी इकठ्ठा करने का काम प्रशासन की ओर से किया जा रहा है. महिला व बाल विकास विभाग की ओर से टास्क फोर्स गठित की है. कोरोना काल में कोविड-19 के कारण 1298 मृतकों की सूची महिला बाल विकास विभाग को प्राप्त हुई. इस सूची से 0 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की जानकारी इकठ्ठा की गई है. 

    सभी बच्चों को कानूनी सुरक्षा

    बाल न्याय देखभाल व संरक्षण अधिनियम 2015 के अनुसार बालसंगोपन योजना का लाभ दिया जाएगा. बालसंगोपन योजना के लिए दो विकल्प है. परिवार में देखभाल करने वाले बच्चों को संगोपन योजना का लाभ 18 वर्ष तक मिलेगा. इन बालकों के लिए 1100 रू. प्रति माह लालन पालन के लिए दिए जाएंगे. साथ ही दूसरे विकल्प में बाल गृह में बच्चों को रखा जाएगा.

    इसके लिए जिले में 4 सरकारी 9 स्वयंसेवी संस्था के बाल गृह, निरीक्षण गृह, गोद लेनेवाली संस्था, अनुरक्षण गृह है. 4 सरकारी संस्था महिला व बाल विकास विभाग की है. जिसमें 9 स्वयंसेवी संस्था व महिला व बाल विकास विभाग अंतर्गत मान्यता से शुरू है. 8 संस्थाओं को सरकार का अनुदान प्राप्त होता है तथा एक अन्य संस्था बगैर अनुदानित तत्व पर शुरू है.