पालकों ने बैरंग लौटाई स्वास्थ्य विभाग की टीम

  • कुपोषण की चपेट में 3 वर्षीय कार्तीक

धारणी. मेलघाट में कुपोषण  कम होने व कुपोषित बालकों की संख्या में  कमी के प्रशासन के दावों की पोल खुली गई है. धारणी शहर से केवल 2 किमी दूर कुसूमकोट बु.  गांव में 3 वर्षीय कार्तिक कुपोषण की अवस्था में पाए जाने से फिर स्वास्थ विभाग में हडकंप मच गया है. मीडिया में खबरें आने के बाद जब स्वास्थ विभाग की टीम बालक के घर पहुंची तो अपना आपा खोते हुए कुपोषित बालक के पालकों ने इस टीम को बैरंग वापस लौटा दिया. से जुझ रहा पालकों का कहना है कि उनका बेटा कार्तिक 3 वर्ष से कुपोषण की चपेट में है. लेकिन अब तक स्वास्थ विभाग ने इसका संज्ञान नहीं लिया. अब मीडिया में को जानकारी लगने के बाद दिखावा किया जा रहा है. 

स्वास्थ विभाग को बताया लापरवाह

कुसूमकोट बु. निवासी  कार्तीक किशोर कादेस्देकर  बालक को देखकर मेलघाट के कुपोषण की गंभीरता का अंदाज लगाया जा सकता है. उसका सामान्य वजन से कई गुणा कम है. इस बालक को गत तीन वर्षों में कोई भी योजना प्रशासन द्वारा नहीं दिया गया.  धारणी जहां पर सभी शासकीय मुख्यालय का निवास स्थान बताया गया और मुख्यालय से केवल 2 किलोमीटर की दूरी पर बालक 3 वर्षों से कुपोषण की अवस्था  होने के बावजूद उस पर ध्यान न दिया जाना स्वास्थ विभाग किसी तरह  लापरवाह है इसका जीता जागता उदाहरण है.  मेलघाट में इस तरह और कितने ही बालक कुपोषण से जुझ रहे होगें यह सवाल भी उठ रहा है.

3 वर्षों में नहीं लिया संज्ञान

 गुरुवार को तहसील स्वास्थ विभाग की टीम कुसुमकोट बु. पहुंची और बालक को उपचार के लिए अस्पताल ले जाने कहा. तब संतप्त किशोर कास्देकर व उनकी पत्नी ने बालक को अस्पताल ले जाने से इंकार किया. उन्होंने इस टीम के कर्मचारियों की क्लास लेते हुए कहा कि वे तीन वर्ष से कहां थे. आज 3 वर्ष बाद अचानक उन्हे कार्तिक की जानकारी कैसे मिल गई. अब तक वे बालक को सम्हाल रहे थे. आगे भी सम्हाल लेगें. 

कुपोषण के आंकडे छुपाने का प्रयास  

गांव वासियों का आरोप है कि स्वास्थ विभाग और बाल विकास विभाग कार्तिक की तरह कई कुपोषण से पीड़ित बालकों पर जानबुझर ध्यान न देते हुए कुपोषण के आंकडे छुपाने का प्रयास करना है.  कुपोषितों को पर्दे के पीछे रखना चाहता है, यहां गुमनामी और बदहाली का जीवन जीते और एक दिन मौत के आगोश में समा जाते, फिर शासन इसे बाल मृत्यु का नाम दे देता, लेकिन इस तरह के बच्चों पर यदि सही तरह ध्यान दिया जाए तो इनके जीवन को भी नई रौशनी दिए जा सकती है,इस कार्तिक पर स्वास्थ विभाग ने भी अपनी और से विशेष ध्यान देना चाहिए तथा आंगनवाडी केंद्र पर भी इस बालक के लिए प्राप्त होने वाली योजनाएं इसे दिए जाना चाहिए ऐसी मांग हो रही है, ऐसे कितने कार्तिक होँगे जो आज गुमनाम जीवन जी रहे हैं,जिन पर अब फिर दुबारा ध्यान देने की जरुरत है. 

जल्द निकालेगें हल

मेलघाट में कई वर्षों से कुपोषण की भीषण समस्या है. लेकिन अब इस पर स्थायी हल  निकाला जाएगा. यहां पर स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने के लिए प्रयास किया जा रहा था. मेलघाटवासियों ने मुझ पर जो विश्वास जताया है उसके अनुरुप काम करते हुए यहां की समस्याएं हल करना मेरी जिम्मेदारी है. कार्तीक के परिवार को राशन कार्ड बनाकर देकर व अन्य सभी सुविधाएं दिलवायी जाएगी. कार्तीक तक स्वास्थ्य विभाग की टीम क्यों नहीं पहुंची इसकी जांच की जाएगी. 

राजकुमार पटेल, विधायक